नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपना स्पष्ट रुख पेश करने को कहा है। अदालत ने इस मुद्दे को जनहित और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताते हुए सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि भविष्य में विरोध प्रदर्शनों के लिए क्या व्यवस्था की जा सकती है।
यह मामला सतीश चंद कौशिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर पीने के पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बड़े स्तर पर होने वाले प्रदर्शनों के दौरान भारी ट्रैफिक जाम लग जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से केंद्र सरकार का पक्ष रखने के निर्देश दिए। साथ ही अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या विरोध प्रदर्शनों के लिए कोई अधिक उपयुक्त या वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है, जहां प्रदर्शनकारियों के अधिकार और आम जनता की सुविधा—दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब और संभावित वैकल्पिक व्यवस्था पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
