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Monday, October 26, 2026

महिला की हत्या में पिता-पुत्र दोषी, 15 गवाहों की गवाही के बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Chhattisgarhमहिला की हत्या में पिता-पुत्र दोषी, 15 गवाहों की गवाही के बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में करीब दो साल पहले हुई महिला की हत्या के मामले में अदालत ने पिता-पुत्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कटेकल्याण थाना क्षेत्र के ग्राम कोटवारपारा तोयलंका में हुई इस वारदात में बिंदू सोढ़ी की हत्या की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के बयान कराए। गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और जब्त किए गए सामान समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने चैतु सोढ़ी और उसके बेटे कुम्मा सोढ़ी को हत्या का दोषी माना।

सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने दोनों को आजीवन कारावास के साथ 2-2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोनों को एक-एक महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

धान की बुआई को लेकर हुआ था विवाद

मामला 24 जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे का है। बिंदू सोढ़ी अपने परिवार के साथ खेत में धान की बुआई और जुताई का काम करा रही थी। इसके लिए दूसरे गांव से ट्रैक्टर बुलाया गया था।

इसी दौरान बिंदू का चाचा चैतु सोढ़ी (50) अपने बेटे कुम्मा सोढ़ी (31) के साथ कुल्हाड़ी लेकर खेत पहुंचा। धान की बुआई को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। पुलिस जांच और कोर्ट में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर चैतु ने बिंदू को जान से मारने की धमकी दी और उसके पीछे दौड़ा। भागते समय बिंदू खेत की ढलान की ओर गिर गई, जिसके बाद कुम्मा ने उसे पकड़ लिया।

टंगिया से हमला, मौके पर हुई मौत

अभियोजन के अनुसार, बिंदू के गिरने के बाद चैतु ने टंगिया से उसके गाल, गले और सिर पर वार किए। गंभीर चोट लगने के कारण बिंदू की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद वहां मौजूद भीमा सोढ़ी और कोसा सोढ़ी डरकर मौके से भाग गए और बाद में पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

पोस्टमार्टम में सामने आईं गंभीर चोटें

बिंदू के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टर टिकेंद्र देवांगन ने किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और चेहरे पर धारदार हथियार से चोट के निशान पाए गए। सिर की एक हड्डी में फ्रैक्चर था और मस्तिष्क में भी खून जमा मिला था।

डॉक्टर ने कोर्ट में बताया कि सिर पर धारदार और सख्त हथियार से लगी चोट के कारण अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिससे महिला की मौत हुई। चिकित्सकीय साक्ष्य में मौत को हत्या बताया गया।

पुलिस ने कपड़े और हथियार किए थे जब्त

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से खून लगी मिट्टी और सामान्य मिट्टी के नमूने लिए। इसके अलावा चैतु सोढ़ी की टी-शर्ट, लुंगी, लाल गमछा और कुल्हाड़ी जब्त की गई। कुम्मा सोढ़ी के कपड़े भी पुलिस ने कब्जे में लिए थे।

जब्त किए गए सामान को जांच के लिए न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL), जगदलपुर भेजा गया था। पुलिस जांच में जुटाए गए इन साक्ष्यों को भी अभियोजन ने अदालत के सामने पेश किया।

15 गवाहों के बयान के बाद दोष साबित

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 15 गवाहों के बयान कराए। पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों की गवाही और जब्त सामान से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला साबित करने का पक्ष रखा।

वहीं, बचाव पक्ष ने दोनों को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि जमीन विवाद के कारण उन्हें झूठा फंसाया गया है। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर चैतु सोढ़ी और कुम्मा सोढ़ी को बिंदू सोढ़ी की हत्या का दोषी माना।

जमीन विवाद बना हत्या की वजह

कोर्ट के अनुसार, बिंदू और दोनों आरोपियों के बीच जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। जिस खेत में घटना हुई, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद होने की बात सामने आई थी। इसी विवाद के दौरान 24 जून 2024 को बिंदू पर हमला किया गया।

अदालत ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य सबूतों के आधार पर माना कि चैतु और कुम्मा ने मिलकर बिंदू पर हमला किया था। इसके बाद दोनों को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

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