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Sunday, October 25, 2026

अंबिकापुर ओपन जेल: कैदी परिवार के साथ रहेंगे, दिन में काम और शाम को जेल वापसी

Chhattisgarhअंबिकापुर ओपन जेल: कैदी परिवार के साथ रहेंगे, दिन में काम और शाम को जेल वापसी

अंबिकापुर। जेल की चारदीवारी में सजा काट रहे बंदियों को परिवार और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक नई पहल शुरू की है। केंद्रीय जेल अंबिकापुर में प्रदेश की पहली फैमिली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (OCI) का शुभारंभ किया गया है। इस व्यवस्था के तहत चयनित बंदियों को अपने परिवार के साथ रहने की सुविधा मिलेगी। साथ ही वे दिन के समय रोजगार या अन्य काम के लिए जेल परिसर से बाहर भी जा सकेंगे और शाम को निर्धारित समय से पहले वापस लौटना होगा।

इस पहल का उद्देश्य बंदियों को सजा पूरी करने के बाद समाज की मुख्यधारा में बेहतर तरीके से पुनर्वासित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। परिवार के साथ रहने और रोजगार करने का अवसर मिलने से बंदियों को सामान्य जीवन की जिम्मेदारियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर 2 अक्टूबर को जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने इस व्यवस्था का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत समेत जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

परिवार के साथ रहेंगे चयनित बंदी

फैमिली ओपन जेल की शुरुआत फिलहाल सीमित क्षमता के साथ की गई है। प्रारंभिक चरण में दो बंदियों को अपने परिवार के साथ रहने की सुविधा दी जाएगी। बंदी अपने परिवार को साथ रख सकेंगे और उनके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं जेल विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। यह व्यवस्था सामान्य जेल से अलग होगी, लेकिन इसमें भी जेल प्रशासन के निर्धारित नियमों और अनुशासन का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

जेल प्रशासन के अनुसार इस सुविधा का लाभ सभी बंदियों को नहीं मिलेगा। पात्रता और चयन के लिए निर्धारित नियमों के आधार पर बंदियों का चयन किया जाएगा। अच्छे आचरण वाले और निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले बंदियों को ही इस व्यवस्था में शामिल किए जाने की बात सामने आई है।

सुबह रोजगार के लिए बाहर, शाम को जेल में वापसी

फैमिली ओपन जेल की सबसे खास बात यह है कि चयनित बंदी दिन के समय रोजगार या अन्य काम के लिए जेल परिसर से बाहर जा सकेंगे। वे सुबह अपने काम के लिए निकलेंगे और काम पूरा करने के बाद शाम को निर्धारित लॉकअप समय से पहले वापस जेल परिसर में लौटेंगे।

इस व्यवस्था के जरिए बंदियों को रोजगार से जोड़ने के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियां निभाने का अवसर भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें सजा पूरी होने के बाद सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने के लिए तैयार करना है।

पहले महीने का राशन जेल विभाग देगा

फैमिली ओपन जेल में रहने वाले बंदी और उनके परिवार के लिए शुरुआती जरूरतों की व्यवस्था जेल विभाग की ओर से की जाएगी। शुरुआत में पहले महीने का राशन विभाग उपलब्ध कराएगा। इसके बाद बंदियों को रोजगार के माध्यम से आय अर्जित कर अपने परिवार के राशन और अन्य जरूरतों की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।

जेल विभाग की ओर से बंदियों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा उनकी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार वैकल्पिक रोजगार के साधन भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

परिवार से जुड़ाव और पुनर्वास पर जोर

जेल प्रशासन का मानना है कि सजा काट रहे बंदियों को परिवार से जोड़े रखना उनके सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया में मददगार हो सकता है। फैमिली ओपन जेल की व्यवस्था में बंदी परिवार के साथ रहकर पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझने के साथ-साथ रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

इस मॉडल का मकसद केवल बंदियों को अलग तरह की सुविधा देना नहीं, बल्कि उन्हें अनुशासन के साथ सामान्य जीवन के लिए तैयार करना है। जेल विभाग की निगरानी और निर्धारित नियमों के बीच बंदी परिवार के साथ रहेंगे और बाहर काम करने के बाद समय पर वापस लौटेंगे।

भविष्य में बढ़ाई जा सकती है सुविधा

अंबिकापुर में यह व्यवस्था फिलहाल शुरुआती चरण में है। अधिकारियों के अनुसार इसके अनुभव और परिणामों की समीक्षा के बाद भविष्य में फैमिली ओपन जेल का आकार और क्षमता बढ़ाई जा सकती है। यानी आने वाले समय में पात्र बंदियों की संख्या बढ़ाने के साथ इस मॉडल का विस्तार भी किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में जेल सुधार की दिशा में शुरू की गई इस पहल को बंदियों के परिवार से जुड़ाव, रोजगार, आत्मनिर्भरता और पुनर्वास से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार और जेल प्रशासन का लक्ष्य है कि सजा पूरी करने के बाद जब बंदी समाज में लौटे तो उसके पास रोजगार का अनुभव और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता हो।

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