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Monday, October 26, 2026

CG News: गांवों में सक्रिय कथित झोलाछाप डॉक्टर, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीरें

HealthCG News: गांवों में सक्रिय कथित झोलाछाप डॉक्टर, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीरें

छत्तीसगढ़: के बिलासपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित फर्जी डॉक्टरों के इलाज का मामला सामने आया है। गांव-गांव जाकर मरीजों का इलाज करने वाले कुछ लोगों पर बिना वैध योग्यता और अनुमति के इंजेक्शन लगाने तथा दवाइयां देने के आरोप लगे हैं। इस मामले ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, मस्तूरी क्षेत्र के दर्रीघाट और मानिकपुर इलाके में किए गए स्टिंग ऑपरेशन के दौरान कुछ ऐसे लोग कैमरे में सामने आए, जो खुद को चिकित्सक बताकर मरीजों का इलाज करते नजर आए। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों के पास जरूरी चिकित्सा योग्यता और एलोपैथिक उपचार करने की वैध अनुमति नहीं है।

होम्योपैथिक डॉक्टर बताने वाले व्यक्ति पर इंजेक्शन लगाने का आरोप

स्टिंग के दौरान एक व्यक्ति मरीज के घर पहुंचा और खुद को होम्योपैथिक चिकित्सक बताया। इस दौरान महिला मरीज को इंजेक्शन लगाए जाने की बात सामने आई। महिला ने कैमरे पर इंजेक्शन लगाए जाने की पुष्टि भी की और उस स्थान को दिखाया जहां इंजेक्शन लगाया गया था।

वहीं, दूसरी महिला को भी इंजेक्शन लगाने की तैयारी चल रही थी। कैमरा सामने आने के बाद दवाइयों से भरे बैग को छिपाने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले ने इलाज करने वाले व्यक्ति की योग्यता और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिना अनुमति इलाज करने वालों पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति के पास वैध चिकित्सकीय योग्यता और एलोपैथिक दवाओं या इंजेक्शन के इस्तेमाल की अनुमति को लेकर सवाल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा इंजेक्शन या गलत दवाओं का इस्तेमाल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और समय पर इलाज नहीं मिलने की स्थिति का फायदा कथित झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। कम खर्च और घर पहुंच इलाज के कारण कई ग्रामीण ऐसे लोगों के संपर्क में आ जाते हैं।

बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी गलत इलाज से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कार्रवाई करते हुए कुछ अवैध क्लीनिकों को बंद किया गया था। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों के जारी रहने के आरोप लग रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे लोगों की पहचान आम लोगों या मीडिया के जरिए हो सकती है, तो नियमित जांच और कार्रवाई करने वाली व्यवस्था इन तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पाती।

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