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Sunday, October 25, 2026

किसान नेता वीरेंद्र सिंह तोमर ने दी हरेली तिहार की शुभकामनाएं, सुख-समृद्धि की कामना

Chhattisgarhकिसान नेता वीरेंद्र सिंह तोमर ने दी हरेली तिहार की शुभकामनाएं, सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख किसान नेता एवं क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक प्रथम पर्व ‘हरेली तिहार’ की गाड़ा-गाड़ा बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी और कुटकी दाई से प्रदेश में अच्छी फसल, सुख-समृद्धि, शांति और भाईचारे की कामना की।

वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और प्रकृति प्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। सावन की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्योहार प्रदेश में तिहारों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

कृषि यंत्रों की पूजा से माटी और संस्कृति से जुड़ने का संदेश

तोमर ने कहा कि हरेली पर कृषि यंत्रों की पूजा करने की परंपरा हमें अपनी माटी और कृषि संस्कृति से जोड़ती है। किसान के लिए कृषि उपकरण केवल औजार नहीं, बल्कि खेती-किसानी में सहयोग करने वाले साधन और देवतुल्य हैं। इनकी पूजा के माध्यम से किसान अपनी मेहनत और कृषि कार्य के प्रति सम्मान प्रकट करता है।

उन्होंने कहा कि हरेली हमें प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति कृतज्ञता का संदेश भी देता है। सदियों से छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ-साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है।

पशुधन की पूजा और सम्मान की परंपरा

हरेली तिहार पर पशुधन के सम्मान की परंपरा का भी विशेष महत्व है। बैल और गायों की पूजा कर उनका आशीर्वाद लेने की परंपरा किसानों और पशुधन के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है।

वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पशुधन हमारे ग्रामीण और कृषि जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हरेली के माध्यम से जीव-जंतुओं के प्रति कृतज्ञता, संवेदनशीलता और नम्रता का भाव मजबूत होता है।

गेड़ी और पारंपरिक खेलों से जुड़ा पर्व

हरेली की पहचान गेड़ी से भी जुड़ी हुई है। इस अवसर पर गेड़ी की पूजा और गेड़ी चढ़ने की परंपरा बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह पैदा करती है। गेड़ी दौड़ के अलावा डंडा-पचरंगा, अत्ती-पत्ती, फुगड़ी, बिल्लस और खो-खो जैसे पारंपरिक खेल भी इस पर्व की रौनक बढ़ाते हैं।

तोमर ने कहा कि ये पारंपरिक खेल स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन का संदेश देते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं।

पारंपरिक व्यंजनों से महकता है हरेली का पर्व

हरेली तिहार पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पकवानों की भी विशेष भूमिका रहती है। ग्रामीण और कृषक परिवारों में बोबरा, खुरमी, ठेठरी, बड़ा, सोहारी, गुड़हा चीला, गुलगुला भजिया, अईरसा और चौसेला जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।

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