लोरमी। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की है। कार्रवाई के दौरान वाहन चालक पर महिला वन अधिकारी और कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने तथा उन पर ट्रैक्टर चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश करने का आरोप है। वन विभाग ने वन अपराध का प्रकरण दर्ज कर वाहन और खनन में इस्तेमाल किए गए औजारों को जब्त कर लिया है।
आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना
वन विभाग के अनुसार, मुंगेली वनमंडलाधिकारी तन्मय कौशिक को भरतपुर परिसर के आरक्षित वन क्षेत्र, कक्ष क्रमांक 556 में अवैध रेत खनन की सूचना मिली थी। इसके बाद उपवनमंडलाधिकारी दशहंस प्रकाश सूर्यवंशी और लोरमी वन परिक्षेत्र अधिकारी जूही वर्मा के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने देर रात कार्रवाई की।
टीम को कन्हैया नाला बांध के पास एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किए जाने की जानकारी मिली। वन विभाग के मुताबिक, मौके पर चेचानडीह निवासी रमेश यादव रेत ले जाते हुए पाया गया।
रोकने पर अभद्रता और वाहन चढ़ाने का आरोप
वन विभाग की टीम ने जब ट्रैक्टर को रोककर रेत परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मांगे, तो चालक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। आरोप है कि इस दौरान उसने महिला वन अधिकारी और कर्मचारियों के साथ अभद्रता की तथा ट्रैक्टर को खतरनाक तरीके से चलाकर उन्हें कुचलने का प्रयास किया। वन अमले की सतर्कता से किसी बड़ी अनहोनी को टाल दिया गया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली और औजार जब्त
कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ अवैध उत्खनन में इस्तेमाल किए गए तीन तसले और दो फावड़े भी जब्त किए। जब्त वाहन और औजारों को उच्च तकनीकी केंद्रीय रोपणी, तुलसाघाट पहुंचाया गया है।
वन विभाग ने वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है। साथ ही, जब्त वाहन और संबंधित सामग्री को राजसात करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस कार्रवाई में उपवनमंडलाधिकारी दशहंस प्रकाश सूर्यवंशी, वन परिक्षेत्र अधिकारी जूही वर्मा सहित वनपाल, वनरक्षक और अन्य वनकर्मी शामिल रहे। पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सहयोग किया।
लोरमी में हुई इस कार्रवाई के बाद अवैध रेत खनन और वन अमले की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। मामले में आगे की कार्रवाई वन विभाग की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
