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Monday, October 26, 2026

PM मोदी के जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ में जलेंगे लाखों दीये, रायपुर में 25 लाख का लक्ष्य; खर्च को लेकर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल

ChhattisgarhPM मोदी के जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ में जलेंगे लाखों दीये, रायपुर में 25 लाख का लक्ष्य; खर्च को लेकर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़े स्तर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर प्रदेशभर में लाखों दीये जलाने की तैयारी है। रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में भी बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम प्रस्तावित है, जहां करीब 25 लाख दीये जलाने की जानकारी सामने आई है। प्रदेशभर में करीब 40 लाख दीये जलाने का कार्यक्रम बताया गया है।

भाजपा इस आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने और ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जोड़ रही है। वहीं, कांग्रेस ने आयोजन को लेकर दीयों की संख्या के साथ-साथ संभावित खर्च और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर BJP की तैयारी

भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर से सेवा और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। पार्टी ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दीप प्रज्ज्वलन के साथ रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान और अन्य सेवा गतिविधियां आयोजित करने की योजना बनाई है।

रायपुर में मुख्य कार्यक्रम मरीन ड्राइव पर आयोजित किया जाना है। यहां 25 लाख दीयों का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में भी अलग-अलग स्थानों पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

भाजपा नेताओं के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जनभागीदारी के साथ सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।

कांग्रेस ने दीयों की संख्या और आयोजन पर उठाए सवाल

भाजपा के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने लाखों दीये जलाने के आयोजन को लेकर सवाल उठाते हुए इसकी जरूरत और उद्देश्य पर प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस की ओर से यह सवाल भी उठाया गया है कि जब यह भाजपा का संगठनात्मक कार्यक्रम है, तो इसके लिए सरकारी तंत्र और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका क्या है और आयोजन में होने वाले खर्च का स्रोत क्या है।

भूपेश बघेल ने पूछा- दीये, बाती और तेल का खर्च किस मद से?

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर सरकार से खर्च का हिसाब मांगने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री के जन्मदिन का कार्यक्रम भाजपा का संगठनात्मक कार्यक्रम है, तो सरकारी विभागों और कलेक्टरों को इसकी तैयारियों में क्यों लगाया जा रहा है।

बघेल ने विशेष रूप से दीये, बाती और तेल की खरीद को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि इन सामानों की खरीद के लिए किस सरकारी मद का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि आयोजन में सरकारी संसाधनों या सरकारी धन का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनता के पैसों से होने वाले किसी भी खर्च का हिसाब सामने आना चाहिए और जरूरत पड़ने पर वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। यह सवाल उन्होंने अपने राजनीतिक बयान के तौर पर उठाया है; उपलब्ध रिपोर्टों में सरकारी खर्च की पुष्टि का कोई स्वतंत्र दस्तावेज सामने नहीं आया है।

रायपुर में 25 लाख दीयों से जगमगाएगा मरीन ड्राइव

रायपुर के मरीन ड्राइव में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की ओर से लोगों को निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करने और कार्यक्रम स्थल के आसपास प्रतिबंधित मार्गों पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की गई है।

रायपुर में कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए कई मार्गों पर डायवर्जन और पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत होंगे कई कार्यक्रम

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को भाजपा के व्यापक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा बताया गया है। अभियान के तहत प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता अभियान और अन्य जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस आयोजन को लेकर जहां भाजपा इसे जनभागीदारी और सेवा गतिविधियों से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस खर्च और सरकारी मशीनरी की भूमिका को लेकर सवाल उठा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर होने वाले कार्यक्रमों के साथ-साथ इसे लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस भी छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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