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Sunday, October 25, 2026

कोल घोटाले में EOW का बड़ा कदम, 9500 पन्नों के चालान में देवेंद्र यादव समेत 12 आरोपी जांच एजेंसी ने बताया वसूली का तरीका

Chhattisgarhकोल घोटाले में EOW का बड़ा कदम, 9500 पन्नों के चालान में देवेंद्र यादव समेत 12 आरोपी जांच एजेंसी ने बताया वसूली का तरीका

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित कोल लेवी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर की विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया है। चालान में कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह यादव, कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय और तत्कालीन खनिज संचालक जयप्रकाश मौर्य समेत कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने चालान में कथित अवैध वसूली, रकम के लेन-देन, संपत्तियों में निवेश और आरोपियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य का उल्लेख किया है।

EOW के अनुसार, यह मामला 500 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध कोल लेवी और अन्य वसूली से जुड़ा है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपये की कथित अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी। जांच में इस रकम के वितरण और संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने का भी दावा किया गया है।

12 लोगों के खिलाफ पेश किया गया चालान

EOW की ओर से पेश छठे पूरक चालान में जिन 12 लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें रामगोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जयप्रकाश मौर्य, पीयूष कुमार साहू, जोगेंद्र सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा शामिल हैं।

जांच एजेंसी ने इन आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, वसूली, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

कोयला परिवहन से 25 रुपये प्रति टन की कथित वसूली

EOW का दावा है कि जांच में कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से 25 रुपये प्रति टन की दर से कथित अवैध वसूली की व्यवस्था सामने आई। एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग जिलों से जुटाई गई रकम रायपुर तक पहुंचाई जाती थी और इसके बाद उसके वितरण का हिसाब रखा जाता था।

जांच में जब्त डायरियों, मोबाइल फोन, व्हाट्सऐप चैट, बैंक लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों को भी साक्ष्य के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है।

आयरन पैलेट परिवहन पर भी 100 रुपये प्रति टन का आरोप

पूरक चालान में कोयले के अलावा आयरन पैलेट के परिवहन से 100 रुपये प्रति टन की कथित अवैध वसूली का भी उल्लेख किया गया है। EOW के अनुसार, लौह अयस्क और पैलेट परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू किए जाने के दौरान भी वसूली से जुड़े तथ्य सामने आए।

जांच एजेंसी ने तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य की भूमिका का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, पैलेट उद्योग से जुड़ी वसूली की प्रविष्टियां जब्त डायरियों में मिली हैं और संबंधित विभागीय कार्रवाई व पत्राचार को भी चालान का हिस्सा बनाया गया है।

डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों का भी जिक्र

EOW ने पूरक चालान में डिजिटल साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण बताया है। जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त मोबाइल फोन, डिजिटल चैट, कंपनियों के पत्राचार और अन्य दस्तावेजों से कथित वसूली व्यवस्था और रकम के लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आए।

चालान में यह भी उल्लेख किया गया है कि सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगियों की विभिन्न जिलों में गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। कुछ सरकारी विश्राम गृहों की बुकिंग ‘सीएम हाउस’ के नाम से कराए जाने का उल्लेख भी जांच में किए जाने की बात सामने आई है।

डायरियों में करोड़ों रुपये की प्रविष्टियों का दावा

जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त डायरियों में रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित 32 प्रविष्टियों में करीब 104.20 करोड़ रुपये का उल्लेख मिला है। इन प्रविष्टियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ जैसे संदर्भों का जिक्र बताया गया है।

इसी तरह देवेंद्र सिंह यादव से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में करीब 3 करोड़ रुपये दर्ज होने का दावा किया गया है। EOW के अनुसार, इनमें खैरागढ़ उपचुनाव से जुड़ी रकम का भी उल्लेख है। इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखा जाना बाकी है।

पहले भी पेश हो चुके हैं पांच पूरक चालान

कोल लेवी मामले में यह पहला चालान नहीं है। EOW के अनुसार, इस प्रकरण में इससे पहले एक मुख्य और पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं। नई विवेचना के दौरान सामने आए दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, डायरी प्रविष्टियों, बैंक लेन-देन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर यह छठा पूरक चालान पेश किया गया है।

अब 9,500 पन्नों के इस पूरक चालान के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। चालान में लगाए गए आरोपों और जांच एजेंसी के दावों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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