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Sunday, October 25, 2026

कोयला खदानों का ज़हरीला कचरा बनेगा पानी साफ़ करने का नया ‘हथियार’, वैज्ञानिकों की खोज से जगी नई उम्मीद

Indiaकोयला खदानों का ज़हरीला कचरा बनेगा पानी साफ़ करने का नया 'हथियार', वैज्ञानिकों की खोज से जगी नई उम्मीद

नई दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि कोयला खदानों से निकलने वाले ठोस कचरे ‘कोल गैंग्यू’ (Coal Gangue) का उपयोग औद्योगिक अपशिष्ट जल को शुद्ध करने में किया जा सकता है। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो यह खनन कचरे के निस्तारण और जल प्रदूषण—दोनों समस्याओं का प्रभावी समाधान बन सकती है।

कैसे काम करती है नई तकनीक?

शोधकर्ताओं के अनुसार, कोल गैंग्यू में प्राकृतिक रूप से सिलिका, एल्यूमिना और आयरन जैसे महत्वपूर्ण खनिज मौजूद होते हैं। विशेष प्रक्रिया से उपचारित करने के बाद यह सामग्री पेरोक्सीमोनोसल्फेट (PMS) को सक्रिय करती है। सक्रिय PMS औद्योगिक अपशिष्ट जल में मौजूद जटिल और जहरीले कार्बनिक प्रदूषकों को रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से विघटित कर देता है, जिससे पानी को अधिक प्रभावी ढंग से साफ किया जा सकता है।

दोहरी समस्या का टिकाऊ समाधान

इस तकनीक के सफल क्रियान्वयन से कोयला खदानों से निकलने वाले विशाल ठोस कचरे का पर्यावरण-अनुकूल उपयोग संभव होगा। साथ ही उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को कम लागत में शुद्ध करने का रास्ता भी खुलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल स्रोतों पर प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में बड़ा कदम

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शोध ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा को मजबूत करता है। हालांकि, इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर अपनाने से पहले इसकी प्रभावशीलता, सुरक्षा और लागत का व्यापक परीक्षण किया जाएगा।

यदि भविष्य में यह तकनीक औद्योगिक स्तर पर सफल साबित होती है, तो यह पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।

मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

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