बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जहर सेवन करने के बाद इलाज के लिए पहुंचे एक युवक को समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि युवक अस्पताल के बाहर तड़पता रहा और उस समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर लेकर गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जहर सेवन के बाद इलाज के लिए पहुंचा था युवक
जानकारी के अनुसार, जहर सेवन करने के बाद युवक उपचार के लिए रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। आरोप है कि उस समय स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और केवल स्टाफ नर्स की मौजूदगी थी। युवक की गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे आगे के इलाज के लिए अंबिकापुर ले गए।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, युवक को उपचार मिलने में हुई देरी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
तीन दिन पहले प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला का वीडियो हुआ था वायरल
रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। इससे करीब तीन दिन पहले भी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। उस दौरान प्रसव के लिए पहुंची एक महिला को कथित तौर पर स्वास्थ्य केंद्र के बाहर ताला लगा मिला था। महिला प्रसव पीड़ा से परेशान रही और इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था और ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है।
स्टाफ नर्स अपूर्वा सिंह भदौरिया निलंबित
प्रसूता से जुड़े मामले का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) की जांच और प्रतिवेदन के बाद संयुक्त संचालक ने रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्टाफ नर्स अपूर्वा सिंह भदौरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
लगातार दो घटनाओं के सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं और ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित हो गया है। विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित घटनाओं के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में क्या व्यवस्थाएं थीं और मरीजों को समय पर उपचार क्यों नहीं मिल पाया।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कही कार्रवाई की बात
मामले को लेकर जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि घटना उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी और लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब इस मामले में जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को समय पर इलाज कैसे सुनिश्चित किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
