रायपुर, 25 सितंबर 2026। जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता से छूट देने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में भी पुराने शिक्षकों के लिए राहत की मांग उठने लगी है। छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष केदार जैन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री से जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के पुराने शिक्षकों के लिए भी पहल करने की मांग की है।
केदार जैन ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से कानूनी राहत देने की मांग की है। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार को भी प्रदेश के पुराने शिक्षकों के हित में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर TET को लेकर प्रस्ताव पारित करना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने क्या प्रस्ताव पारित किया?
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 24 सितंबर को एक प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया। इसमें केंद्र सरकार से 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग की गई है। प्रस्ताव में RTE Act, 2009 की धारा 23 में आवश्यक वैधानिक संशोधन करने और NCTE के माध्यम से जरूरी अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया गया है।
यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर की स्कूल शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू की ओर से पेश किया गया था। विधानसभा में चर्चा के बाद इसे पारित किया गया। हालांकि, यह विधानसभा का प्रस्ताव है; इससे अपने आप TET की कानूनी अनिवार्यता समाप्त नहीं होती। प्रस्ताव में आगे की कार्रवाई केंद्र सरकार और संबंधित वैधानिक प्रक्रिया के स्तर पर किए जाने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद TET का मुद्दा अहम
TET की अनिवार्यता का मुद्दा हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद महत्वपूर्ण हुआ है। शीर्ष अदालत के फैसलों में RTE Act और NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम शिक्षक योग्यता के संदर्भ में TET की भूमिका पर विचार किया गया है। अप्रैल 2026 के एक सुप्रीम कोर्ट आदेश में भी TET को शिक्षक नियुक्ति के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता के संदर्भ में चर्चा की गई थी।
इसी कानूनी पृष्ठभूमि के बीच पुराने और पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अलग राहत की मांग विभिन्न स्तरों पर उठ रही है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का हालिया प्रस्ताव इसी मांग का एक उदाहरण है।
छत्तीसगढ़ में भी विशेष सत्र की मांग
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के प्रस्ताव के बाद अब छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ ने भी राज्य सरकार से इसी तरह पहल करने की मांग की है। केदार जैन का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के मामले को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने तथा पुराने शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने की मांग की है।
अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और पुराने शिक्षकों के TET से जुड़े मुद्दे पर राज्य स्तर से कोई प्रस्ताव या पहल सामने आती है।
