मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और सियासी अटकलों का दौर तेज हो गया है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार कमजोर हो रही है और यदि यही स्थिति बनी रही तो वर्ष 2029 तक उसका राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
संजय निरुपम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों और नेताओं के दूसरे खेमे के संपर्क में होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। इन अटकलों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
- “धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी पार्टी”
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना (UBT) लगातार अपना जनाधार खो रही है। उनके अनुसार पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता भविष्य को लेकर असमंजस में हैं और संगठन के भीतर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले वर्षों में पार्टी के सामने अस्तित्व का संकट और गहरा सकता है।
- सांसदों के संपर्क में होने की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हुई है कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद और वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर लगातार चर्चा जारी है।
- उद्धव ठाकरे ने बुलाई अहम बैठक
पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और टूट की खबरों के बीच उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में संगठनात्मक मजबूती, आगामी चुनावी रणनीति और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर चर्चा की जाएगी।
- UBT ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर शिवसेना (UBT) के नेताओं ने पार्टी में टूट और असंतोष की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सभी सांसद, विधायक और पदाधिकारी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एकजुट हैं और संगठन पहले की तरह मजबूती से काम कर रहा है।
- महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से राज्य की राजनीति लगातार नए मोड़ ले रही है। यदि भविष्य में दल-बदल की घटनाएं सामने आती हैं, तो सत्ता और विपक्ष दोनों के समीकरण बदल सकते हैं। वहीं यदि उद्धव ठाकरे अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो यह उनके नेतृत्व के लिए बड़ी राजनीतिक जीत मानी जाएगी।