कोलकाता: पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर सियासी बहस के बीच राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी को पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए लागू किया जाएगा। उनका कहना है कि इस मामले में वही तरीका अपनाया जाएगा, जैसा गुजरात और असम जैसे राज्यों ने अपनाया है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत लागू होगा यूसीसी
शुक्रवार को कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में आयोजित साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती समारोह में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है और उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “यूसीसी लागू करने की एक तय प्रक्रिया है और हम उसी का पालन करेंगे। यह प्रक्रिया गुजरात और असम में अपनाए गए मॉडल के समान होगी।”
गुजरात और असम मॉडल का दिया उदाहरण
सुवेंदु अधिकारी ने अपने बयान में गुजरात और असम का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों ने समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में विधायी और प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए हैं। पश्चिम बंगाल में भी यदि यूसीसी लागू किया जाता है तो संविधान और कानून के अनुरूप सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। यूसीसी लागू होने पर इन मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
बंगाल में फिर गरमा सकता है राजनीतिक माहौल
सुवेंदु अधिकारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में यूसीसी को लेकर चर्चा तेज है। पश्चिम बंगाल में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पहले भी यूसीसी को लेकर अपनी अलग राय रख चुकी है, जबकि भाजपा लंबे समय से इसे लागू करने की पक्षधर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल में यूसीसी का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है, खासकर विधानसभा चुनावों से पहले।
संवैधानिक प्रक्रिया पर दिया जोर
सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी भी प्रकार का फैसला संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में इस दिशा में कदम उठाया जाता है तो सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और संवैधानिक बनी रहे।
