रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों पार्टी से निष्कासित नेताओं की वापसी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) यानी जोगी कांग्रेस के कांग्रेस में विलय को लेकर चर्चा तेज है। प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कई नेताओं की वापसी से जुड़े मामलों पर विचार किया है, लेकिन डॉ. रेणु जोगी और अमित जोगी से जुड़े प्रकरणों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
हालिया अनुशासन समिति की बैठक में कांग्रेस में वापसी के लिए आए 36 आवेदनों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ मामलों में कार्रवाई समाप्त करने का फैसला लिया गया, जबकि कई प्रकरणों को आगे विचार के लिए रखा गया। अमित जोगी और रेणु जोगी से जुड़े मामले भी अभी लंबित बताए जा रहे हैं।
मामला सामान्य वापसी से अलग क्यों?
जोगी कांग्रेस का मामला केवल किसी एक नेता की कांग्रेस में वापसी तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की ओर से पार्टी के कांग्रेस में विलय के साथ उसके पदाधिकारियों और सदस्यों की कांग्रेस में वापसी का प्रस्ताव रखा गया है। यही वजह है कि इसे सामान्य अनुशासनात्मक कार्रवाई वाले मामलों से अलग माना जा रहा है।
कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेंद्र साहू की ओर से भी इसे पार्टी के विलय से जुड़ा मामला बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस पर नए प्रदेश प्रभारी के साथ चर्चा के बाद आगे निर्णय लिया जाना है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से विलय को मंजूरी दिए जाने की कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है।
2023 में अमित जोगी ने भूपेश बघेल के खिलाफ लड़ा था चुनाव
जोगी कांग्रेस के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक चर्चा इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि अमित जोगी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, मौजूदा समय में कांग्रेस के भीतर विलय को लेकर किसी एक नेता को आधिकारिक तौर पर फैसले में बाधा डालने वाला नहीं बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में मामला संगठन स्तर पर विचाराधीन बताया गया है।
27 सितंबर को हो सकती है अहम चर्चा
अब कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के 27 सितंबर को प्रस्तावित रायपुर दौरे पर नजरें टिकी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके दौरे के दौरान प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में जोगी कांग्रेस के विलय के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
इस बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के विलय और उससे जुड़े नेताओं की कांग्रेस में वापसी पर पार्टी क्या निर्णय लेती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर विलय के विरोध में किसी एक नेता का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
नगरीय निकाय चुनाव से पहले बढ़ी संगठनात्मक हलचल
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ी हैं। निष्कासित नेताओं की वापसी के आवेदनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ने और जोगी कांग्रेस के विलय के प्रस्ताव ने पार्टी के भीतर चर्चा को और बढ़ा दिया है। अब 27 सितंबर की बैठक के बाद इन मामलों को लेकर कांग्रेस का अगला कदम सामने आने की उम्मीद है।
