कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के अलीपुर क्षेत्र स्थित एक सरकारी परिसर में लगी भीषण आग के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आग की चपेट में हालिया चुनावों में इस्तेमाल की गई बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) आ गईं। घटना के बाद विपक्षी दलों ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
- EVM को लेकर बढ़ा विवाद
आग लगने की घटना के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि आग में वास्तव में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी मशीनें नष्ट हुई हैं, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वे मशीनें किस उद्देश्य से वहां रखी गई थीं और उनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम थे।
कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सभी आशंकाओं का समाधान हो सके। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक आग लगने के कारणों को लेकर अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
- मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर सियासी संग्राम
इसी बीच मध्य प्रदेश की वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को लेकर भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन निरस्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया है।
- सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
मामला न्यायपालिका तक भी पहुंचा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए नियमित चुनाव याचिका दायर करने का सुझाव दिया। इसके बाद विपक्ष ने न्यायिक प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की।
- देशभर की अन्य प्रमुख घटनाएं
देश के अन्य हिस्सों से भी कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की यात्रा के दौरान शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पर पथराव की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इस घटना में उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कथित तौर पर एक फेरीवाले और एक बच्चे से धार्मिक नारे लगवाने का मामला सामने आया है। घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
- जांच और पारदर्शिता की मांग
इन सभी घटनाओं के बीच विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों में तथ्यों का जल्द और स्पष्ट खुलासा होना लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।