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Wednesday, June 17, 2026

हल्दीघाटी युद्ध पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- “महाराणा प्रताप की विजय को इतिहास में मिला कम स्थान”

Indiaहल्दीघाटी युद्ध पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- “महाराणा प्रताप की विजय को इतिहास में मिला कम स्थान”

उदयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए इतिहास लेखन और उसके प्रस्तुतिकरण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास के कई अध्यायों को लंबे समय तक ऐसे ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे देश के स्वदेशी नायकों की भूमिका अपेक्षित रूप से सामने नहीं आ सकी।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने महाराणा प्रताप के संघर्ष, साहस और राष्ट्रनिष्ठा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि स्वाभिमान, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का प्रतीक था।

  • इतिहास की व्याख्या पर उठाए सवाल

भागवत ने कहा कि इतिहास का मूल्यांकन केवल तत्कालीन युद्धक्षेत्र की घटनाओं से नहीं, बल्कि उसके दीर्घकालिक परिणामों और प्रभावों से भी किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि युद्ध के बाद विरोधी सेना अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर सकी और मेवाड़ का संघर्ष जारी रहा, तो उस संघर्ष की सफलता को भी समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इतिहास में भारतीय वीरों और शासकों के योगदान को अधिक व्यापकता से सामने लाने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को बेहतर ढंग से जान सके।

  • महाराणा प्रताप के संघर्ष को बताया प्रेरणा

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, साहस और आत्मसम्मान की मिसाल है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांतों और स्वतंत्रता के संकल्प से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि वे आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं।

  • इतिहास के पुनर्पाठ पर जोर

अपने संबोधन में भागवत ने इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो भारतीय समाज, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के नायकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को उनके वास्तविक योगदान के आधार पर याद किया जाना चाहिए।

  • क्यों चर्चा में है हल्दीघाटी का युद्ध?

साल 1576 में लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक माना जाता है। यह युद्ध मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच हुआ था। वर्षों से इतिहासकारों के बीच इसके परिणाम और प्रभाव को लेकर विभिन्न मत सामने आते रहे हैं। इसी वजह से यह विषय समय-समय पर सार्वजनिक और वैचारिक बहस का केंद्र बनता रहा है।

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