कांचीपुरम (तमिलनाडु): केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधायी मंचों पर राजनीतिक बहसों और चर्चाओं का पुरजोर समर्थन किया है। तमिलनाडु के कांचीपुरम दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन का पटल ही आलोचना और बहस के लिए सबसे उपयुक्त मंच है।
गुरुवार को एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “अगर विधानसभा में नहीं तो और कहाँ राजनीतिक आलोचना की जा सकती है? विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए और सत्ता पक्ष को उसका जवाब देना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”
विकास परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव भेजने की सलाह
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने तमिलनाडु सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि राज्य में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और विकास सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार को केंद्र के पास उचित प्रस्ताव भेजने चाहिए।
वित्तीय प्रबंधन पर दिया जोर
बेहतर और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन की वकालत करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि धन उधार लेना कोई बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस पैसे का उपयोग किस तरह किया जा रहा है। उन्होंने आगे जोड़ा, “यदि संसाधन उपलब्ध हैं, तो सरकारें सीधे जनता को वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती हैं।”
