बक्सर (बिहार), 30 जून 2026
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सोमवार (29 जून) को बक्सर विधानसभा से भाजपा विधायक और पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी आनंद मिश्रा पीड़ित परिवार से मिलने बिलौटी गांव पहुंचे। उन्होंने मृतक भरत तिवारी के पिता और अन्य परिजनों से मुलाकात कर उनका ढाढस बंधाया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
‘जिला पुलिस के बजाय CID करे मामले की जांच’
परिजनों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए आनंद मिश्रा ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह मामला फिलहाल न्यायिक जांच के अधीन है और मुझे पूरा विश्वास है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस पूरे मामले की जांच जिला पुलिस के बजाय सीआईडी (CID) को सौंपी जानी चाहिए।”
गिरफ्तारी में देरी और ‘डीके बसु गाइडलाइन’ का उल्लंघन
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह इस विषय पर सीधे मुख्यमंत्री से बात करेंगे और जानेंगे कि सरकार का इस पर क्या रुख है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा कि यदि वीडियो में यह दिख रहा है कि भरत तिवारी ने हथियार फेंक दिया था और उसके बाद उसे गोली मारी गई, तो यह सामान्य न्याय के सिद्धांतों और ‘डीके बसु गाइडलाइन’ की भावना के बिल्कुल खिलाफ है। कानून कभी भी ऐसी कार्रवाई का समर्थन नहीं करता। इस मामले को मानवाधिकार के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। चूंकि इस मामले में हत्या का केस दर्ज है, इसलिए जांच के आधार पर ही दोष तय होगा।
एसटीएफ (STF) को बुलाने के फैसले पर उठाए सवाल
जब आनंद मिश्रा से एसटीएफ की भूमिका पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त पुलिस बल या एसटीएफ को बुलाने का निर्णय हमेशा स्थानीय पुलिस के अनुरोध पर ही लिया जाता है। ऐसे में शुरुआती तौर पर यह साफ है कि कहीं न कहीं स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और निर्णयों में कमी रही है, जिसकी वजह से यह नौबत आई।
12 दिन बाद पहुंचने पर दी सफाई
घटना के 12 दिन बाद गांव पहुंचने के सवाल पर भाजपा विधायक ने कहा कि वह कुछ निजी कारणों से क्षेत्र से बाहर थे। हालांकि, वह लगातार स्थानीय नेताओं, डीआईजी (DIG) और एसपी (SP) के संपर्क में बने हुए थे और पल-पल की अपडेट ले रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि भरत तिवारी की समस्याओं और उनकी मांगों को समय रहते गंभीरता से सुना गया होता, तो आज यह दुखद स्थिति पैदा नहीं होती।
