रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी (नवा रायपुर) गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए प्रशासन द्वारा करीब 80 मकानों को ढहाए जाने के बाद बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए हैं। इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर निशाना साध रहा है। इसी बीच कांग्रेस के दो विधायकों ने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए इस परियोजना के तहत मिलने वाले सरकारी आवास को लेने से इनकार कर दिया है।
कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि गरीबों के आशियाने उजाड़कर बनने वाले सरकारी आवास को वे स्वीकार नहीं कर सकते। उनका कहना है कि जब सैकड़ों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं, तब ऐसे आवास में रहना उनकी अंतरात्मा स्वीकार नहीं करती। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकारी आवास की आवश्यकता नहीं है और सरकार उनका आवास किसी अन्य जरूरतमंद को दे सकती है।
सोमवार को नकटी गांव में राजस्व विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना है कि जिस भूमि पर मकान बने थे वह सरकारी जमीन थी और लंबे समय से उस पर अवैध कब्जा किया गया था। कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को नोटिस दिए गए थे और कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी।
हालांकि, प्रभावित ग्रामीणों का दावा है कि वे कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे थे। उनका आरोप है कि जिन मकानों को तोड़ा गया, उनमें से कुछ प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत भी बनाए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने बारिश के मौसम में उन्हें बेघर कर दिया, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ लोगों ने मशीनों के सामने खड़े होकर कार्रवाई रोकने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कार्रवाई के बाद कई परिवार अपना सामान खुले में रखने और अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हो गए।
वहीं प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के अनुसार, नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में विस्थापित परिवारों को बसाने की तैयारी की गई है। इसके अलावा भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और लोगों का सामान पहुंचाने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विकास के नाम पर गरीबों के घर उजाड़ना उचित नहीं है और सरकार को पहले पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए था। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और किसी भी पात्र परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
रायपुर के नकटी गांव में हुई यह कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। कांग्रेस विधायकों द्वारा सरकारी आवास लेने से इनकार किए जाने के बाद इस मुद्दे ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। आने वाले दिनों में यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है
