छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब और कोल लेवी घोटाला मामलों की जांच तेज करते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने रामगोपाल अग्रवाल के पिछले तीन वर्षों के ठिकानों, आर्थिक लेन-देन और कथित नेटवर्क से जुड़े कई सवाल पूछे।
जानकारी के मुताबिक, वैभव अग्रवाल से सुबह से देर शाम तक पूछताछ चली, हालांकि फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है। EOW ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। एजेंसी का कहना है कि जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल का नाम करीब 3,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले, 450 करोड़ रुपये के कथित कोल लेवी वसूली मामले और 127 करोड़ रुपये के कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले की जांच में सामने आया है। एजेंसियां कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
सूत्रों का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनकी लोकेशन को लेकर देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। EOW को उनके प्रदेश में होने का इनपुट मिलने के बाद जांच में तेजी लाई गई है और उनसे जुड़े लोगों से पूछताछ कर आर्थिक नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
क्या है कथित शराब घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए लगभग 3,200 करोड़ रुपये का कथित घोटाला हुआ। मामले में कई आईएएस अधिकारी, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच व अदालती प्रक्रिया जारी है।
