नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी है तो जांच सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में होनी चाहिए।
जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि मामले में कई स्तरों पर अनियमितताओं के संकेत हैं।
उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) वास्तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर है, तो उसे केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करनी चाहिए। उनका दावा है कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सांसद ने मंदिर निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण प्रक्रिया में कथित तौर पर कमीशनखोरी की शिकायतें सामने आई हैं और पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
इससे पहले जॉन ब्रिटास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में लाने की मांग भी कर चुके हैं। उनका तर्क है कि ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकारी अधिसूचना के माध्यम से हुआ है, इसलिए उसकी जवाबदेही भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित नकदी और आभूषणों की हेरफेर का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी जांच शुरू की है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में कई संदिग्ध घटनाएं सामने आने की बात कही गई है, जिनमें कुछ कर्मचारियों पर नकदी छिपाने के आरोप लगाए गए हैं।
इस बीच, इस मामले से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है, जबकि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
