रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को जोरदार राजनीतिक हंगामे के साथ हुई।
सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर चर्चा कराने की मांग उठाई। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और विरोध के चलते विधानसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चर्चा के लिए कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया।
उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था और यदि चढ़ावे में अनियमितता हुई है तो यह पूरे देश के श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित लूट हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा चाहता है।
वहीं, भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस की मांग का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है। हालांकि कांग्रेस विधायकों का कहना था कि राज्य के लोगों ने भी राम मंदिर निर्माण में योगदान दिया है, इसलिए इस विषय पर चर्चा उचित है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कांग्रेस द्वारा दिए गए स्थगन प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह विषय छत्तीसगढ़ से सीधे तौर पर संबंधित नहीं है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है।
अध्यक्ष के फैसले के बाद कांग्रेस विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे और सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। पहले कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित किया गया, लेकिन दोबारा सदन शुरू होने पर भी विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद से जुड़े पोस्टर दिखाते हुए विरोध जारी रखा।
इस दौरान अजय चंद्राकर ने कहा कि अध्यक्ष अपना निर्णय दे चुके हैं और बार-बार उसी विषय को उठाना सदन की मर्यादा तथा अध्यक्ष के निर्णय का सम्मान न करने के समान है। लगातार हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा कर दी।
मानसून सत्र के पहले दिन ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर हुए इस राजनीतिक टकराव ने स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
