जम्मू:
आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति के तहत भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। जम्मू की एक विशेष एनआईए अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की याचिका पर लश्कर-ए-तैयबा के सरगना और मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कार्रवाई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (बैसरन) में हुए भीषण आतंकी हमले के मामले में की गई है।
नए कानूनों से कसेगा शिकंजा: अनुपस्थिति में चलेगा मुकदमा
भारत के नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 356 के तहत अब पाकिस्तान में छिपे हाफिज सईद के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में भी मुकदमा चलाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
- अदालत के इस वारंट को औपचारिक माध्यमों से पाकिस्तान भेजा जाएगा।
- यदि पाकिस्तान हमेशा की तरह कोई जवाब नहीं देता है, तो हाफिज सईद को भगोड़ा घोषित कर भारत में उसकी अनुपस्थिति में ही अदालती ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।
क्या था 2025 का पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
- 26 लोगों की हुई थी मौत: अप्रैल 2025 में पहलगाम के बैसरन मैदान में पाकिस्तानी आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर 26 बेकसूर लोगों की जान ले ली थी। एनआईए की जांच के अनुसार, इस पूरे हमले की साजिश सीमा पार बैठे हाफिज सईद और उसके संगठन ने रची थी।
- भारतीय सेना का मुंहतोड़ जवाब: इस दर्दनाक हमले के बाद भारतीय सेना ने आतंकियों और उनके आकाओं को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस ऑपरेशन के तहत सेना ने सीमा पार और नियंत्रण रेखा के पास चल रहे आतंकियों के कई लॉन्च पैड और ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था।
एनआईए की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बड़ा खुलासा
एनआईए ने हाल ही में अदालत में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें साइंटिफिक सबूतों और डिजिटल डेटा के जरिए यह साबित किया गया है कि पहलगाम हमले को पूरी तरह से पाकिस्तान से ही कंट्रोल और डायरेक्ट किया जा रहा था। कोर्ट ने माना कि निष्पक्ष और पूरी जांच के लिए हाफिज सईद की गिरफ्तारी और कस्टोडियल पूछताछ बेहद जरूरी है।
ग्लोबल टेररिस्ट हाफिज सईद भले ही लंबे समय से पाकिस्तानी हुक्मरानों और वहां की सेना की शह पर कानूनी कार्रवाई से बचता रहा हो, लेकिन भारत के नए सख्त कानूनों और एनआईए की इस कार्रवाई से अब उसे भारतीय अदालत से सजा मिलना तय माना जा रहा है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
