रायपुर:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित केंद्रीय जेल (Raipur Central Jail) से महिला सशक्तिकरण और सुधार की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। जेल प्रशासन की एक अनोखी पहल के तहत महिला बंदियों ने अचार बनाने का काम शुरू कर, न सिर्फ अपने समय का सदुपयोग किया है बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम भी बढ़ाया है। इस पहल के जरिए जेल की चारदीवारी के भीतर बंद महिलाएं अब स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की ओर कदम: रायपुर जेल प्रशासन द्वारा महिला बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस कौशल विकास कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके तहत महिलाओं को पेशेवर तरीके से अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
स्वाद के साथ आत्मनिर्भरता की राह: जेल में बंद महिला कैदियों द्वारा तैयार किए जा रहे इस अचार को पूरी तरह शुद्ध और पारंपरिक तरीके से बनाया जा रहा है। इस काम से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ हुनर सीख रही हैं, बल्कि इससे होने वाली कमाई से वे आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।
सकारात्मक बदलाव और सुधार: जेल प्रशासन के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से बंदियों की मानसिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आता है। अपराध बोध से दूर रहकर जब वे रचनात्मक कार्यों में मन लगाती हैं, तो उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जागृत होता है।
facebook.com/reel/1056897377090629/?s=single_unit
भविष्य के लिए नई उम्मीद: इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब ये महिला बंदी अपनी सजा पूरी कर जेल से बाहर जाएं, तो उनके पास आजीविका चलाने का एक जरिया हो। वे समाज में सिर उठाकर सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें और दोबारा किसी गलत रास्ते पर न भटके।
जेल प्रशासन का संदेश:
रायपुर जेल की यह पहल साबित करती है कि जेल सिर्फ सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि सुधार गृह भी बन सकते हैं। महिला बंदियों द्वारा बनाया गया यह ‘आत्मनिर्भरता का अचार’ जल्द ही स्थानीय बाजारों या जेल के काउंटर के माध्यम से लोगों तक उपलब्ध कराया जा सकता है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
