नई दिल्ली, 15 जून: ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए कांग्रेस ने भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक भूमिका को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Pawan Khera ने दावा किया कि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारत की कोई सक्रिय भूमिका दिखाई नहीं दी, जबकि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे देशों ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई।
सोमवार को जारी बयान में पवन खेड़ा ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता वैश्विक शांति के लिए सकारात्मक कदम है और इससे क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान के बाद संभव हो पाया है, जिससे पश्चिम एशिया के कई देशों को गंभीर क्षति उठानी पड़ी।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत, जो कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली कूटनीतिक हस्तक्षेप के लिए जाना जाता था, इस पूरे घटनाक्रम में “मूकदर्शक” बनकर रह गया। उन्होंने विदेश मंत्री S. Jaishankar के पुराने बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता की भूमिका को लगातार कमतर आंका है।
पवन खेड़ा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता के कारण पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया गया था, लेकिन मौजूदा समय में पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय स्थिरता और शांति का समर्थक देश के रूप में प्रस्तुत करने में सफल रहा है। उनके अनुसार, इससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है।
कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष सीधे तौर पर भारत से जुड़ा नहीं था, लेकिन ऐसे बड़े वैश्विक घटनाक्रमों में भारत की अनुपस्थिति देश की अंतरराष्ट्रीय साख के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार से विदेश नीति के मोर्चे पर अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाने की मांग की।
अपने बयान के अंत में पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि मौजूदा हालात भारत की कूटनीतिक चुनौतियों को उजागर करते हैं और देश को वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका मजबूत करने की आवश्यकता है।