नई दिल्ली:
देश की राजनीतिक प्राथमिकताओं और बुनियादी मुद्दों को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि इस समय देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता ‘धर्म’ नहीं, बल्कि ‘शिक्षा और स्वास्थ्य’ होनी चाहिए।
इमरान मसूद ने यह बयान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए दिया। उन्होंने सत्तापक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि नेताओं को केवल राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर जमीनी हकीकत पर गौर करना चाहिए।
नीति आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला
अपने दावों को मजबूत करने के लिए कांग्रेस सांसद ने सरकारी आंकड़ों का सहारा लिया। मसूद ने कहा कि नेताओं को नीति आयोग (Niti Aayog) की रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसी रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में करीब 92,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। मसूद ने सवाल उठाया कि अगर देश में इतनी बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थान बंद हो रहे हैं, तो विकास के दावों की असलियत क्या है?
बुनियादी मुद्दों पर घेरने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष अब सरकार को घेरने के लिए भावनात्मक मुद्दों के बजाय शिक्षा
स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसे बुनियादी विषयों को ढाल बना रहा है। इमरान मसूद के इस बयान ने एक बार फिर संसद से लेकर सड़क तक देश के विकास मॉडल और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर एक नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
