रायपुर (महानदी भवन):
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पीने के साफ पानी (पेयजल) की किल्लत को हमेशा के लिए दूर करने और जल योजनाओं को लंबे समय तक चालू रखने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के तहत ग्रामीण पेयजल योजनाओं के सुचारू संचालन और रखरखाव नीति पर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए।
इस नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब गांवों की नल-जल योजनाओं की पूरी जिम्मेदारी और संस्थागत व्यवस्था सीधे ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जाएगी।
बैठक के 5 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण फैसले
मुख्य सचिव विकासशील ने बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और जल जीवन मिशन के अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:
- प्रतिदिन शुद्ध जल की गारंटी
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी व्यापक रणनीति तैयार की जाए जिससे राज्य के सभी ग्रामीण परिवारों को प्रतिदिन निर्धारित मानदंडों के अनुसार शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल मिल सके। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- पंचायतों को कमान और जन-सहभागिता
अब गांवों की पेयजल योजनाओं को चलाने की जिम्मेदारी सरकारी विभागों की बजाए स्थानीय ग्राम पंचायतों की होगी। इसके लिए पंचायतों को सरकार की तरफ से हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा। इन योजनाओं का जमीनी रखरखाव ‘ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों’ के माध्यम से किया जाएगा, ताकि इसमें आम जनता की भागीदारी (जन-सहभागिता) सुनिश्चित हो सके।
- पारदर्शिता के लिए ‘सोशल ऑडिट’ और ग्राम सभा अनिवार्य
योजनाओं में भ्रष्टाचार को रोकने और पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए अब सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) कराया जाएगा। इसके साथ ही, अब प्रदेश के प्रत्येक गांव की ग्राम सभा की बैठक में जल जीवन मिशन और पानी की आपूर्ति के मुद्दे पर चर्चा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- पानी की बर्बादी रोकने के लिए लगेंगे ‘वाटर मीटर’
योजना को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए बजट प्रबंधन और जल शुल्क निर्धारण पर भी मंथन हुआ। पानी की बर्बादी (लीकेज और क्षति) को कम करने और बेहतर राजस्व जुटाने के लिए भविष्य में बजट प्रावधानों के तहत गांवों में भी ‘वाटर मीटर’ लगाने पर विचार-विमर्श किया गया है।
- कड़ाई से होगी मॉनिटरिंग
पीने के पानी की क्वालिटी की समय-समय पर जांच और अलग-अलग स्तरों पर अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग के लिए एक सख्त ढांचा तैयार किया जा रहा है, ताकि कोई भी योजना तकनीकी खराबी के कारण बंद न पड़े।
बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस उच्च स्तरीय बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने ‘जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ नीति’ के प्रारूप (ड्राफ्ट) और इसके विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन (प्रस्तुतिकरण) दिया।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित जल जीवन मिशन, पीएचई (PHE) और अन्य संबद्ध विभागों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
असर: गांवों को कैसे मिलेगा फायदा?
अब तक कई गांवों में नल-जल योजनाएं बनने के कुछ समय बाद रखरखाव के अभाव में बंद हो जाती थीं। लेकिन अब जिम्मेदारी सीधे ग्राम पंचायत और स्थानीय समितियों को मिलने से, खराबी आने पर गांव के स्तर पर ही उसे तुरंत ठीक किया जा सकेगा। सोशल ऑडिट और ग्राम सभा में चर्चा होने से पानी की सप्लाई में पारदर्शिता आएगी और हर घर को नियमित रूप से साफ पानी मिल सकेगा
