बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) की सात सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शुरू हो गया। चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं, जबकि सातवीं सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
मतदान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक दिनेश गुंडू राव ने पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस को किसी भी बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी अपने दम पर सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है और क्रॉस-वोटिंग की आशंका के चलते उन्हें रिसॉर्ट में रखा गया था। हालांकि, उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और किसी प्रकार की क्रॉस-वोटिंग नहीं होगी।
आर. अशोक ने कहा कि भाजपा के पास अतिरिक्त वोट हैं, जिन्हें सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) को ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे जेडीएस उम्मीदवार को भी लाभ मिलने की संभावना है।
- 7 सीटों के लिए 8 उम्मीदवार मैदान में
विधान परिषद की सात सीटों के लिए कुल आठ उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद, टिप्पन्नाप्पा कामकनूर, पीवी मोहन और शिवन्ना मलावली को प्रमुख उम्मीदवार के रूप में उतारा है। वहीं भाजपा की ओर से रघु कौटिल्य और लिंगराज पाटिल चुनाव लड़ रहे हैं।
सबसे रोचक मुकाबला सातवीं सीट के लिए माना जा रहा है, जहां कांग्रेस के विनय कार्तिक और जेडीएस के गोविंदराजू के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
- जीत के लिए 28 वोट जरूरी
चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 28 वोटों की आवश्यकता होगी। मतदान प्रक्रिया शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसके बाद मतगणना और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
- डीके शिवकुमार की रणनीति पर सबकी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह पहला बड़ा राजनीतिक मुकाबला है, जिसमें उनकी रणनीति और संगठन क्षमता की परीक्षा होगी।
