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Saturday, July 25, 2026

राम मंदिर में चंदा विवाद के बाद बड़ा फैसला: सिर्फ डिग्री नहीं, नए CEO के लिए ‘राम भक्ति’ होगी सबसे बड़ी शर्त

Indiaराम मंदिर में चंदा विवाद के बाद बड़ा फैसला: सिर्फ डिग्री नहीं, नए CEO के लिए 'राम भक्ति' होगी सबसे बड़ी शर्त

अयोध्या:

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी (चंदा) विवाद के बाद प्रबंधन को पारदर्शी और अचूक बनाने के लिए ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं। ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति होने जा रही है।

इस बेहद अहम और जिम्मेदारी भरे पद के लिए सर्च कमेटी ने योग्यता के कड़े मानदंड तय किए हैं। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी के सदस्य और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे ने स्पष्ट कर दिया है कि इस पद के लिए सिर्फ बड़ी कॉर्पोरेट डिग्रियां या पेशेवर अनुभव ही काफी नहीं होगा।

‘राम के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव’ सबसे पहली शर्त

सर्च कमेटी के अनुसार, अयोध्या राम मंदिर का पहला CEO बनने के लिए उम्मीदवार में “भगवान राम के प्रति अटूट श्रद्धा और सेवा भाव” होना सबसे पहली और अनिवार्य योग्यता है।

“कोई सूखा प्रोफेशनल (सिर्फ कॉर्पोरेट दिमाग वाला व्यक्ति) इस तरह का मंदिर नहीं चला सकता। सबसे पहली जरूरत राम के प्रति श्रद्धा का भाव है। दूसरी बात समाज की सेवा की भावना और श्रद्धालुओं का सम्मान है। इसके बाद ही हम अन्य पेशेवर डिग्रियां और अनुभव देखेंगे।”

डिग्री के अलावा ये गुण भी हैं जरूरी

नए सीईओ का काम सिर्फ दफ्तर संभालना नहीं होगा, बल्कि वे मंदिर मैनेजमेंट की ‘रीढ़’ होंगे। उम्मीदवार में निम्नलिखित विशिष्ट गुणों और क्षमताओं का होना आवश्यक है:

  • पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन: दान और चढ़ावे में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए मजबूत अकाउंटिंग व्यवस्था लागू करना।
  • भीड़ और आपदा प्रबंधन प्रतिदिन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन की व्यवस्था संभालना।
  • मानव संसाधन (HR) और संस्थागत प्रशासन: मंदिर के करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों के कार्यबल और सामग्री प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना।
  • तकनीक की समझ: डिजिटल काउंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सीसीटीवी और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को लागू करने की क्षमता।

क्यों पड़ी CEO की जरूरत?

अयोध्या राम मंदिर का 500 वर्षों से अधिक का एक ऐतिहासिक और भावनात्मक संघर्ष रहा है, जिससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी है। हाल ही में ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई अहम बैठक में यह माना गया कि ज्यादातर ट्रस्टी देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं

और रोज़मर्रा की मॉनिटरिंग के लिए अयोध्या में मौजूद नहीं रह सकते। ऐसे में चंदा विवाद के बाद श्रद्धालुओं के भरोसे को दोबारा मजबूत करने और दैनिक प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक पूर्णकालिक और जवाबदेह शीर्ष अधिकारी (CEO) का होना बेहद जरूरी हो गया है।

ट्रस्ट आगामी 22 जुलाई को होने वाली अपनी अगली बड़ी बैठक में नए सीईओ के नाम की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।

मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

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