कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मचे अंदरूनी घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी और महज एक महीने पहले TMC की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गईं वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शनिवार को अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब कोलकाता में टीएमसी के राज्य मुख्यालय पर बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी खेमे) के कथित कब्जे और दफ्तर में ताला लटकने की खबरें सुर्खियों में हैं। चंद्रिमा के इस कदम ने बंगाल की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है।
ममता को भेजा पत्र; वित्तीय और कानूनी अधिकार भी छोड़े
पूर्व वित्त और स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सीधे टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा पत्र भेजा। उन्होंने न केवल संगठन के पदों को छोड़ा है, बल्कि तकनीकी रूप से भी पार्टी को पूरी तरह पंगु बना दिया है:
- वित्तीय कमान छोड़ी: चंद्रिमा ने विभिन्न बैंकों में मौजूद टीएमसी के खातों के ‘ऑथराइज्ड सिग्नेटरी’ के पद से खुद को हटा लिया है। यानी अब उनके हस्ताक्षर से पार्टी फंड का लेन-देन नहीं होगा।
- चुनाव आयोग से नाता तोड़ा: उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष ममता बनर्जी के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी वापस ले ली है।
- प्राथमिक सदस्यता पर सस्पेंस: हालांकि, उन्होंने अभी तक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके इस कदम को पार्टी से पूरी तरह नाता तोड़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सिर्फ एक महीने में ही क्यों टूटा भरोसा?
चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद और संकटमोचक नेताओं में गिनी जाती रही हैं। 5 जून को ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में सुब्रत बक्शी की जगह चंद्रिमा को बंगाल टीएमसी की कमान सौंपी गई थी।
‘कालीघाट टीएमसी में काम करने का माहौल नहीं’
इस इस्तीफे के बाद जहां टीएमसी आधिकारिक तौर पर बैकफुट पर नजर आ रही है, वहीं पार्टी के बागी और विपक्षी दल ममता सरकार पर हमलावर हो गए हैं:
- बागी खेमे का बयान: टीएमसी के निष्कासित विधायक संदीपान साहा ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, “कालीघाट टीएमसी में अब काम करने का कोई माहौल नहीं बचा है। जिसे भी पद दिया जा रहा है, वह इस्तीफा दे रहा है।”
- भाजपा का तंज: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि टीएमसी का आंतरिक ढांचा अब पूरी तरह ढह चुका है।
आगे क्या? कोलकाता मुख्यालय पर बागी गुट के नियंत्रण और प्रदेश अध्यक्ष के इस अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद अब गेंद ममता बनर्जी के पाले में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य का बागी खेमे की तरफ झुकाव आगामी दिनों में बंगाल की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है।
