रायपुर। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभर रहे असंतोष और कुछ सांसदों के अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपनी राजनीतिक सोच के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है और संविधान ऐसे अधिकारों की रक्षा करता है।
मीडिया से चर्चा के दौरान विजय शर्मा ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि या समूह किसी नए राजनीतिक दल का गठन करना चाहता है, तो उसे संविधान और निर्वाचन संबंधी नियमों के तहत आगे बढ़ने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र विभिन्न विचारों और राजनीतिक विकल्पों का सम्मान करता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसी संभावित नए दल या राजनीतिक मंच को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसे में उसके भविष्य या समर्थन जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि जब कोई नया राजनीतिक संगठन औपचारिक रूप से सामने आएगा और उसकी विचारधारा व उद्देश्य स्पष्ट होंगे, तब उस पर राजनीतिक स्तर पर विचार किया जा सकता है।
विजय शर्मा ने लोकतांत्रिक राजनीति को गतिशील बताते हुए कहा कि समय-समय पर दलों के भीतर मतभेद सामने आते हैं और कई बार नए राजनीतिक समूह भी अस्तित्व में आते हैं। यह प्रक्रिया लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और इसे संवैधानिक दायरे में रहकर ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में TMC के कुछ नेताओं और सांसदों को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हुई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियां आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी भी नए राजनीतिक दल के गठन को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि TMC से जुड़े असंतुष्ट नेता अलग राह चुनते हैं, तो इसका असर केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में विजय शर्मा का बयान लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों पर केंद्रित नजर आया।