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Saturday, July 25, 2026

शिवसेना में घमासान: ‘हम पर बुलडोजर क्यों चलाओगे?’ संजय राउत के ‘ऑपरेशन तोड़वा’ वाले बयान पर सांसद संजय जाधव का पलटवार

Indiaशिवसेना में घमासान: 'हम पर बुलडोजर क्यों चलाओगे?' संजय राउत के 'ऑपरेशन तोड़वा' वाले बयान पर सांसद संजय जाधव का पलटवार

मुंबई / परभणी: महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल को लेकर जारी घमासान अब और तेज हो गया है। हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट (Shiv Sena UBT) छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। संजय राउत द्वारा इन सांसदों के खिलाफ ‘ऑपरेशन तोड़वा’ चलाए जाने वाले बयान पर परभणी के सांसद संजय जाधव ने तीखा पलटवार किया है।

जाधव ने राउत के तीखे शब्दों पर आपत्ति जताते हुए सीधा सवाल किया, “राउत ने सीधे तौर पर हमें कुचलने (क्रश करने) की बात कही, लेकिन आप हमें क्यों कुचलेंगे?”

‘विकास के लिए लिया फैसला’ — संजय जाधव

संवाददाताओं से बातचीत करते हुए संजय जाधव ने अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं, लेकिन कई बार जनहित और क्षेत्र के विकास के लिए कड़े कदम उठाने पड़ते हैं।

  • धैर्य की जरूरत: जाधव ने कहा, “राजनीति में हमें कई आरोपों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। हमें धैर्यपूर्वक उन्हें सहन करना होगा। जहां जवाब देने की जरूरत होगी, हम निश्चित रूप से जवाब देंगे।”
  • क्षेत्र का विकास प्राथमिकता: उन्होंने साफ किया कि हालांकि पार्टी के प्रति वफादारी महत्वपूर्ण है, लेकिन अपने क्षेत्र (परभणी) की विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और जनता के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है।

क्या था संजय राउत का आरोप?

इससे पहले, शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिंदे गुट में शामिल होने वाले सभी छह लोकसभा सांसदों पर चौतरफा हमला बोला था।

राउत ने नासिक विधान परिषद चुनाव में भाजपा के वोटों के कथित ट्रांसफर और उसके तुरंत बाद गोकुल गीते को पार्टी में शामिल किए जाने का उदाहरण देते हुए महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति को “पैसे और खरीद-फरोख्त की राजनीति” करार दिया।

लगातार बढ़ रही है सियासी तपिश

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले सांसदों के इस बड़े दलबदल ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुटों के बीच की कड़वाहट को चरम पर पहुंचा दिया है। जहां एक तरफ ठाकरे गुट इसे “विश्वासघात” बता रहा है, वहीं शिंदे गुट में शामिल हुए नेता इसे “विकास की राजनीति” का नाम दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक खींचतान और उग्र होने की संभावना है।

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