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Tuesday, September 8, 2026

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली पर चिराग पासवान का सरकार को पत्र, 55 साल आयु सीमा समेत 6 मांगें

Indiaसहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली पर चिराग पासवान का सरकार को पत्र, 55 साल आयु सीमा समेत 6 मांगें

पटना। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने नियमावली में व्यापक सुधार और पुनर्विचार की मांग करते हुए अभ्यर्थियों, छात्रों और वर्षों से कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों के हित में कई सुझाव सरकार के सामने रखे हैं।

चिराग पासवान ने कहा कि नई नियुक्ति नियमावली तैयार करते समय अभ्यर्थियों के साथ-साथ लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के भविष्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने की मांग की है।

55 वर्ष तक हो अधिकतम आयु सीमा

चिराग पासवान ने सहायक प्राध्यापक पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में सेवाएं दे रहे योग्य अभ्यर्थियों को भी नियमित नियुक्ति प्रक्रिया में अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने स्थायी बहाली को प्राथमिकता देने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं स्पष्ट बनाने पर भी जोर दिया है।

बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग

केंद्रीय मंत्री ने बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्तियों के लिए डोमिसाइल नीति लागू करने की भी पैरवी की है। उन्होंने स्थानीय अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर देने की दिशा में सरकार से ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

इसके अलावा उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में UGC Regulation 2018 को लागू करने और नए भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले लंबे समय से कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों के सेवा सामंजन पर विचार करने की मांग की है।

कांग्रेस ने भी नियमावली पर उठाए सवाल

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली को लेकर कांग्रेस ने भी बिहार सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने नियमावली को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं बताते हुए सरकार से इसमें आवश्यक बदलाव करने की मांग की है।

चिराग पासवान के पत्र के बाद अब सरकार के रुख पर नजर है। यदि सरकार इन सुझावों पर विचार करती है तो इसका सीधा असर बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया और लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर पड़ सकता है।

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