मुंबई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार देश के वास्तविक और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं और जनता उनकी बात सुनना चाहती है। खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों, भाषा विवाद और सरकार की नीतियों को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा।
भाषा विवाद को लेकर हिमंता बिस्वा सरमा पर पलटवार
पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सरकार मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जिस मुद्दे पर सवाल उठाए जाने चाहिए, उससे ध्यान हटाने के लिए दूसरे विवादों को सामने लाया जा रहा है।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार को उन घटनाओं और फैसलों पर जवाब देना चाहिए, जिनका सीधा संबंध जनता और लोकतांत्रिक अधिकारों से है।
कृति सेनन के विज्ञापन पर कंगना की टिप्पणी का भी दिया जवाब
अभिनेत्री कृति सेनन के एक विज्ञापन पर कंगना रनौत की टिप्पणी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी पवन खेड़ा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता के अधिकार के समर्थन में हमेशा खड़े रहे हैं।
खेड़ा ने इस मुद्दे को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी पसंद और विचार व्यक्त करने की आजादी होनी चाहिए।
योगी के ‘Gen-Z’ संवाद पर कसा तंज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘Gen-Z’ संवाद को लेकर भी पवन खेड़ा ने सरकार पर तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही सरकार को अचानक युवाओं की याद आने लगी है।
खेड़ा ने युवाओं से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि देश के युवा रोजगार, शिक्षा और अपने भविष्य को लेकर गंभीर सवालों के जवाब चाहते हैं। ऐसे में केवल संवाद कार्यक्रमों के बजाय इन मुद्दों पर ठोस काम होना चाहिए।
राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस का दावा
पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को सामने ला रहे हैं और उनकी बातों को देशभर में सुना जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष लगातार सरकार से जवाबदेही की मांग करता रहेगा।
कांग्रेस नेता के इन बयानों के बाद एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं।
