रायपुर 1 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में Seasonal Influenza A (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रदेश में इस साल जनवरी से अब तक 130 मरीजों में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से 99 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 31 मरीज फिलहाल एक्टिव हैं।
मामलों में बढ़ोतरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को संक्रमण की रोकथाम, मरीजों की निगरानी, समय पर उपचार और रिपोर्टिंग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
31 अगस्त को जारी हुआ दिशा-निर्देश
संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ के अंतर्गत एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) की ओर से 31 अगस्त 2026 को जारी निर्देश में संदिग्ध और संभावित H1N1 मरीजों की समय पर पहचान करने पर जोर दिया गया है।
विभाग ने सभी जिलों को संक्रमित मरीजों की 100 प्रतिशत रिपोर्टिंग IHIP पोर्टल पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, उपचार व्यवस्था और लोगों के बीच जागरूकता अभियान प्रभावी तरीके से चलाने को कहा गया है।
रायपुर में सबसे ज्यादा मामले
राजधानी रायपुर में H1N1 के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। जिले में तीन नए मरीज मिलने के बाद अब तक संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें करीब 11 मरीज एक्टिव बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा दुर्ग, रायगढ़, बिलासपुर, धमतरी, कोरबा, बेमेतरा और महासमुंद समेत प्रदेश के अन्य जिलों में भी H1N1 के सक्रिय मरीज मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक संक्रमण का दायरा अब उन जिलों तक भी पहुंच रहा है, जहां पहले इस बीमारी के मामले सामने नहीं आए थे।
सर्दी-खांसी और बुखार हो सकते हैं प्रमुख लक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार H1N1 मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में सर्दी, खांसी, गले में खराश, बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हैं। कुछ मरीजों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है।
संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और ड्रॉपलेट के जरिए फैल सकता है। विभाग के दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि लक्षण शुरू होने के शुरुआती दिनों में संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है।
मरीजों को तीन श्रेणियों में बांटा गया
स्वास्थ्य विभाग ने H1N1 मरीजों को उनकी स्थिति के आधार पर Category-A, B और C में वर्गीकृत किया है।
- Category-A: हल्का बुखार, खांसी और गले में खराश जैसे सामान्य लक्षण।
- Category-B: तेज बुखार, गंभीर गले का संक्रमण या हाई रिस्क ग्रुप से जुड़े मरीज।
- Category-C: सांस लेने में परेशानी, खून वाली खांसी, मानसिक स्थिति में बदलाव, दौरे, लगातार बिगड़ते लक्षण या अन्य गंभीर संकेत वाले मरीज।
सांस लेने की तेज गति, SpO2 का 90 प्रतिशत से कम होना, पेशाब कम होना और सायनोसिस जैसे लक्षणों को गंभीर स्थिति के संकेत के तौर पर देखा गया है।
Category-B और C मरीजों के इलाज पर विशेष जोर
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार Category-B और Category-C मरीजों को Oseltamivir देने की बात कही गई है। वहीं गंभीर Category-C मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार देने की सलाह दी गई है।
जरूरत पड़ने पर ऐसे मरीजों के लिए ऑक्सीजन, IV फ्लूड, पोषण और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन, द्वितीयक संक्रमण की स्थिति में एंटीबायोटिक्स और वेंटिलेटरी सपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
होम आइसोलेशन में मरीजों को बरतनी होगी सावधानी
जिन Category-A और Category-B मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर होम आइसोलेशन में भेजा जाता है, उन्हें 7 दिनों तक अलग रहने की सलाह दी गई है। मरीज को हवादार कमरे में रहने, मास्क पहनने, अन्य लोगों से दूरी बनाए रखने और व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं अलग रखने को कहा गया है।
तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, अचानक चक्कर या भ्रम, लगातार उल्टी अथवा अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की भी होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने H1N1 संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों की Contact Tracing करने के निर्देश दिए हैं। संपर्क में आने वाले लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी और लक्षण सामने आने पर जांच एवं उपचार कराया जाएगा।
आवश्यक मामलों में रोकथाम के लिए Chemoprophylaxis दिए जाने का भी प्रावधान बताया गया है। विभाग ने सभी जिलों को H1N1 के संदिग्ध और असामान्य मामलों की जानकारी निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल राज्य कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
