रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश की राशन दुकानों में कथित अनियमितताओं का मामला जोर-शोर से उठा। बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि कई उचित मूल्य की दुकानों में प्रशासनिक संरक्षण के तहत दबाव बनाकर मसालों की बिक्री कराई जा रही है।
विधायक सुशांत शुक्ला ने जनवरी से मार्च 2026 के दौरान बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की राशन दुकानों में हुए भौतिक सत्यापन की जानकारी मांगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सत्यापन किया गया था, तो इसकी पूरी जानकारी सदन के सामने क्यों नहीं रखी गई।
इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि बेलतरा क्षेत्र की सभी 87 राशन दुकानों का भौतिक सत्यापन कराया गया था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रत्येक दुकान के निरीक्षण के लिए 25 दिनों का समय दिया गया था और खाद्य विभाग समय-समय पर दुकानों का निरीक्षण करता है। मंत्री के अनुसार, निरीक्षण के दौरान जहां भी अनियमितताएं मिलीं, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
शुक्ला ने आगे आरोप लगाया कि कुछ राशन दुकानों में गरीब हितग्राहियों को निर्धारित खाद्यान्न के साथ मसाले खरीदने के लिए भी दबाव डाला जा रहा है।
उन्होंने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से मसालों की बिक्री की कोई आधिकारिक व्यवस्था की है और क्या महिला स्व-सहायता समूहों को इस संबंध में कोई जिम्मेदारी दी गई है।
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने स्पष्ट किया कि राशन दुकानों के माध्यम से मसालों की बिक्री संबंधी किसी सरकारी व्यवस्था की उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उचित मूल्य की दुकानों में चावल, शक्कर, गुड़, चना और नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जाता है।
विपक्ष के आरोपों के बाद मंत्री ने पूरे मामले की जांच कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मानसून सत्र के दौरान राशन वितरण व्यवस्था और उससे जुड़े आरोपों को लेकर हुई इस चर्चा के बाद अब सरकार की प्रस्तावित जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।
