रायपुर: स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच एक सर्वे रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां बिजली की खपत में कमी दर्ज की गई है। हालांकि, इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं ने पहले की तुलना में बिजली बिल अधिक आने की शिकायत की है। इस विरोधाभास की वजह भी अब सामने आ गई है।
सर्वे के मुताबिक, स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर पहले से अधिक निगरानी रख रहे हैं। मोबाइल ऐप और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं के कारण लोग अनावश्यक बिजली उपयोग से बच रहे हैं, जिससे कुल बिजली खपत में कमी देखी गई है।
हालांकि, कई उपभोक्ताओं को लग रहा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण स्मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग है। पुराने मीटरों में कई बार रीडिंग में त्रुटियां, अनुमानित बिल या कम रिकॉर्डिंग की शिकायतें सामने आती थीं, जबकि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत का सटीक हिसाब दर्ज करते हैं। ऐसे में अब उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक बिजली खपत के अनुसार बिल मिल रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर केवल बिलिंग को पारदर्शी नहीं बनाते, बल्कि बिजली चोरी रोकने, लाइन लॉस कम करने और बिजली वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, लोगों के बीच जागरूकता की कमी के कारण कई बार बढ़े हुए बिलों को सीधे स्मार्ट मीटर से जोड़कर देखा जाता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली, रियल-टाइम बिजली उपयोग और बिलिंग प्रक्रिया की बेहतर जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके और लोग इस तकनीक का पूरा लाभ उठा सकें।
- सर्वे में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली खपत में कमी का दावा।
- कई उपभोक्ताओं ने पहले से अधिक बिजली बिल आने की शिकायत की।
- विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़े बिल की मुख्य वजह स्मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग है।
- स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी रोकने और बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
- जागरूकता बढ़ने से स्मार्ट मीटर को लेकर फैली गलतफहमियां कम हो सकती हैं।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
