रायपुर। क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी सनातनियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि है और गुरु के मार्गदर्शन के बिना व्यक्ति के जीवन में सही दिशा और ज्ञान का प्रकाश संभव नहीं है।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी भारतीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने इसे महाभारत काल से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि इस दिन को व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास का जन्म इसी दिन ऋषि पराशर और सत्यवती के घर हुआ था। वेदव्यास ने वैदिक ज्ञान को व्यवस्थित करते हुए वेदों को चार भागों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—में विभाजित किया। उनके इस महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें ‘व्यास’ की उपाधि मिली।
तोमर ने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने अपने शिष्यों सुमंतु, जैमिनी, वैशम्पायन और पैला को वैदिक ज्ञान प्रदान किया और गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत आधार दिया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के सम्मान का पर्व है।
क्षत्रिय करणी सेना प्रदेश अध्यक्ष ने गुरु पूर्णिमा को बौद्ध और जैन परंपराओं से भी जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि बौद्ध इतिहास में इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपने पूर्व शिष्यों को धर्म का उपदेश दिया था और धर्मचक्र प्रवर्तन की शुरुआत हुई थी। वहीं जैन परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान महावीर ने गौतम स्वामी को अपना पहला शिष्य बनाया था।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, जिसने जीवन में ज्ञान, संस्कार और सही दिशा प्रदान की है।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सनातन परंपरा में गुरु को अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला माना गया है। योग परंपरा में भी इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है, जहां भगवान शिव को प्रथम गुरु मानकर सप्तऋषियों को योग ज्ञान देने की मान्यता है।
उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरुओं, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें।
