आरा/भोजपुर:
बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोशल मीडिया पर पुलिस को धमकी देने और भड़काऊ पोस्ट साझा करने वाले उत्तर प्रदेश के दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के खिलाफ भोजपुर पुलिस सख्त कानूनी कार्रवाई करने जा रही है। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और उन्हें गोली मारने की कथित धमकी देने के आरोप में दीपक दीक्षित के खिलाफ आरा साइबर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा रही है।
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) राज ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने और जनमानस को भड़काने की कोशिश की है।
पुलिस को दी खुली चुनौती, जुटाए जा रहे डिजिटल साक्ष्य
SP राज ने बताया कि दीपक दीक्षित द्वारा इंटरनेट मीडिया पर जो टिप्पणियां की गई हैं, वे न केवल पुलिस के लिए एक खुली चुनौती हैं, बल्कि समाज में हिंसा और वैमनस्य फैलाने का प्रयास भी हैं। पुलिस इस मामले से जुड़े सभी डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नामजद करते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
17 जून को हुआ था भरत तिवारी का एनकाउंटर
गौरतलब है कि बीते 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें भरत तिवारी मारा गया था। इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक, आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट शेयर की जा रही थीं, जिन पर भोजपुर पुलिस लगातार नजर रख रही थी।
आरोपी दीपक दीक्षित का आपराधिक इतिहास
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी दीपक दीक्षित उर्फ पंडित मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले (शिवगढ़ थाना क्षेत्र के डेहली गांव) का रहने वाला है। भोजपुर पुलिस के अनुसार, उसका पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है।
- मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित कोतवाली और महिला थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म, छेड़खानी और आपत्तिजनक वीडियो-फोटो वायरल कर परिजनों को धमकाने जैसे गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं।
“कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं” – SP भोजपुर
भोजपुर एसपी ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर हिंसा के लिए उकसाने या पुलिस अधिकारियों को डराने-धमकाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इंटरनेट मीडिया के जरिए समाज में नफरत फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
