नई दिल्ली/बिलासपुर। भिलाई नगर विधानसभा सीट से विधायक देवेंद्र यादव को चुनाव याचिका से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। इसके साथ ही अब हाईकोर्ट में लंबित चुनाव याचिका की नियमित सुनवाई और साक्ष्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल से किया इनकार
देवेंद्र यादव की ओर से दाखिल SLP Civil No. 28778/2026 पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया और याचिका खारिज कर दी।
यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित निर्वाचन याचिका क्रमांक 9/2024 से जुड़ा है। इस याचिका के जरिए 2023 के भिलाई नगर विधानसभा चुनाव में देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। याचिका में उनके नामांकन के दौरान दिए गए शपथ-पत्र में आवश्यक जानकारियों के प्रकटीकरण और निर्वाचन की वैधता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल का रास्ता साफ
दरअसल, नियमित ट्रायल शुरू होने से पहले देवेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर कुछ मुद्दों पर प्रारंभिक फैसला करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को यह आवेदन खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने माना था कि संबंधित मुद्दे केवल कानून के सवाल नहीं हैं, बल्कि उनमें तथ्य और कानून दोनों जुड़े हुए हैं। इसलिए इनका फैसला पक्षकारों के साक्ष्य सामने आने के बाद ही किया जाना उचित होगा।
31 अगस्त से दर्ज होंगे साक्ष्य
सुप्रीम कोर्ट से SLP खारिज होने के बाद अब चुनाव याचिका की सुनवाई नियमित ट्रायल के चरण में आगे बढ़ेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 31 अगस्त से गवाहों के बयान और साक्ष्य दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है।
इस दौरान चुनाव से जुड़े दस्तावेज, नामांकन पत्र, शपथ-पत्र और अन्य रिकॉर्ड न्यायालय के सामने रखे जा सकते हैं। दोनों पक्षों को अपने दावों और बचाव के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
SLP खारिज होने का मतलब चुनाव रद्द होना नहीं
महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि देवेंद्र यादव का निर्वाचन रद्द हो गया है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश केवल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप से संबंधित है।
भिलाई नगर से उनका निर्वाचन वैध है या नहीं, इसका अंतिम फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल, दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।
पहले भी सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली थी राहत
निर्वाचन विवाद में देवेंद्र यादव की यह दूसरी महत्वपूर्ण कानूनी चुनौती है जिसमें उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। इससे पहले चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज कराने के प्रयास से संबंधित SLP Civil No. 6306/2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी 2026 को खारिज किया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस चुनाव विवाद की मुख्य कानूनी लड़ाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नियमित ट्रायल में होगी। आने वाले दिनों में गवाहों की परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।
