पटना/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर एनकाउंटर की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी खुलकर पुलिस के समर्थन में सामने आए हैं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा, “अगर वह (भरत तिवारी) पुलिस को मार देता तो ठीक था?” उनके इस बयान को पुलिस कार्रवाई के समर्थन और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
मांझी ने संकेत दिया कि यदि पुलिस ने आत्मरक्षा या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की है, तो उसे एकतरफा तरीके से कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
पांच पुलिसकर्मी निलंबित
एनकाउंटर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
पवन सिंह ने की निष्पक्ष जांच की मांग
भोजपुरी अभिनेता और नेता पवन सिंह ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर अब केवल एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक पक्ष जहां एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष पुलिस के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस बहुचर्चित एनकाउंटर की वास्तविक परिस्थितियों से पर्दा उठा सकती है
