बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी जिले के वर्ष 2007 के शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती कथित अनियमितता मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने मामले से जुड़े सात आरोपियों को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि समान आरोपों वाले अन्य सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी जमानत का लाभ दिया जाना उचित है।
2007 में हुई थी 172 शिक्षाकर्मी पदों पर भर्ती
मामला धमतरी जिले के जनपद पंचायत मगरलोड में वर्ष 2007 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। उस समय कुल 172 पदों पर भर्ती की गई थी। आरोप है कि चयन समिति के कुछ सदस्यों और अन्य आरोपियों ने कथित साजिश के तहत कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के आधार पर अंक बढ़ाकर उन्हें चयनित कर दिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के कारण योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति से वंचित होना पड़ा। मामले में वर्ष 2011 में मगरलोड थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
आरोपियों की ओर से दी गई ये दलील
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि पूरी भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुसार कई स्तरों पर जांच और स्क्रीनिंग के बाद पूरी की गई थी। अधिवक्ता ने बताया कि भर्ती के लिए करीब 5,000 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी जांच के बाद अंतिम चयन सूची तैयार की गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस के पास ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने किसी आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया था। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि इसी मामले में कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है।
हाईकोर्ट ने लगाई ये शर्तें
हाईकोर्ट ने सातों आरोपियों को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि यदि उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक-एक जमानतदार पर रिहा किया जाएगा।
इसके अलावा कोर्ट ने आरोपियों को निर्देश दिया है कि:
- वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
- किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
- सुनवाई के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहेंगे।
- भविष्य में किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।
- 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करेंगे।
- शर्तों का उल्लंघन हुआ तो रद्द हो सकती है जमानत
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार या शिकायतकर्ता जमानत रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं इस फैसले के बाद 18 साल पुराने शिक्षक भर्ती अनियमितता मामले में आरोपियों को बड़ी राहत मिली है, हालांकि मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
