नई दिल्ली। भारत की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कथित तौर पर एक बड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघन (Cyber Security Breach) का शिकार हुई है। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के सिस्टम से सैकड़ों गीगाबाइट डेटा लीक होने का दावा किया गया है, जिससे कॉर्पोरेट और तकनीकी जगत में चिंता बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि एक हैकर फोरम पर लगभग 630GB से अधिक डेटा और 2 लाख से ज्यादा फाइलों के लीक होने का दावा किया गया है। लीक किए गए कथित सैंपल डेटा में वैश्विक टेक कंपनियों से संबंधित संवेदनशील दस्तावेजों की मौजूदगी की भी चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें Apple की सप्लाई चेन से जुड़ी कुछ जानकारियां और Tesla के मैन्युफैक्चरिंग दस्तावेज भी शामिल होने का दावा किया गया है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि कुछ सप्ताह पहले कंपनी के आईटी सिस्टम में एक सुरक्षा संबंधी समस्या की पहचान की गई थी। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई। हालांकि कंपनी का कहना है कि इस घटना का उसके उत्पादन और व्यावसायिक संचालन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है।
फिलहाल कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वास्तव में कौन-कौन सा डेटा प्रभावित हुआ है और इस घटना से कितने ग्राहक या व्यावसायिक साझेदार प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और उद्योग जगत इस मामले पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेटा लीक के दावे सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा मामलों में से एक हो सकता है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स वर्तमान में भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही है तथा कई वैश्विक कंपनियों की सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
इस बीच साइबर सुरक्षा एजेंसियां और कंपनी की तकनीकी टीमें घटना की जांच में जुटी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डेटा ब्रीच की वास्तविक सीमा क्या थी, कौन-सी सूचनाएं प्रभावित हुईं और इसके पीछे जिम्मेदार तत्व कौन हैं।
फिलहाल उद्योग जगत और निवेशकों की नजर जांच के नतीजों पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
