नई दिल्ली:
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्ष 2016 से जारी विवाद के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल रही है। दोनों राज्यों के बीच हालिया वार्ता के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अगले तीन महीनों के भीतर इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान निकल सकता है।
30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की पहल पर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि उनकी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सकारात्मक चर्चा हुई है और दोनों राज्य आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
महानदी जल विवाद की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी, जब ओडिशा सरकार ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ में नदी पर किए जा रहे निर्माण कार्यों से राज्य में पानी के प्रवाह पर असर पड़ रहा है। इसके बाद वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) का गठन किया गया था।
इस वर्ष अप्रैल में न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों को कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का अवसर दिया था।
इसी क्रम में अब दोनों राज्यों की संयुक्त तकनीकी टीमें नदी के जलस्तर और जल प्रवाह से संबंधित प्रमाणिक आंकड़ों का आदान-प्रदान कर रही हैं, ताकि निर्णय विश्वसनीय तथ्यों के आधार पर लिया जा सके।
दोनों राज्यों ने स्पष्ट किया है कि वे बातचीत की प्रक्रिया जारी रखेंगे और महानदी के जल संसाधनों के न्यायसंगत एवं प्रभावी प्रबंधन के लिए स्वीकार्य समाधान तलाशने का प्रयास करेंगे। यदि यह पहल सफल रहती है, तो लगभग एक दशक से लंबित महानदी जल विवाद का जल्द समाधान संभव हो सकता है।
