जगदलपुर, 31 अगस्त 2026। बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। एनआईए की विशेष अदालत ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 5 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सोमवार को यह तारीख निर्धारित की।
इससे पहले अदालत में फैसला सुनाए जाने की उम्मीद थी, लेकिन अब निर्णय को 5 सितंबर तक सुरक्षित रख दिया गया है। मामले में 12 अगस्त को अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी है। करीब 13 साल से चले आ रहे इस चर्चित मामले में अब सभी की नजरें विशेष अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
फैसले पर टिकी निगाहें
झीरम घाटी मामले में अदालत का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर अदालत अपना निर्णय सुनाएगी। फैसला आने के बाद मामले से जुड़े कई कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
TS सिंहदेव के बयान से फिर गरमाया सुरक्षा का मुद्दा
फैसले से पहले पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव के बयान के बाद झीरम घाटी हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। हमले के समय सुरक्षा इंतजामों और घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
सिंहदेव के बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुराने सवाल एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं।
क्या था झीरम घाटी हत्याकांड?
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया था।
इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षा जवानों और अन्य लोगों की मौत हुई थी। झीरम घाटी की घटना को छत्तीसगढ़ के सबसे घातक नक्सली हमलों में गिना जाता है।
कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की गई थी जान
हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी। हमले में सुरक्षा बलों के जवान भी शहीद हुए थे।
करीब 13 साल से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 5 सितंबर 2026 को NIA स्पेशल कोर्ट का फैसला आने के बाद झीरम घाटी हत्याकांड से जुड़े कानूनी पहलुओं और अदालत के निष्कर्ष पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
