छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आए 17.24 करोड़ रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए SDM कार्यालय के दो बाबुओं और तहसील कार्यालय के एक बाबू को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने फर्जी सर्पदंश मृत्यु प्रकरण तैयार कर सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराने में अहम भूमिका निभाई।
यह मामला बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में उठाए जाने के बाद चर्चा में आया था। अब तक इस मामले में 14 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और जांच की निगरानी एसएसपी रजनेश सिंह स्वयं कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और हरिशंकर राठौर शामिल हैं। इन पर अपनी आधिकारिक लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और मुआवजा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आरोप है।
इससे पहले सिम्स की तत्कालीन डॉक्टर प्रियंका सोनी को फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि पूरे घोटाले के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था। मामले में तहसील कार्यालय के ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा और अधिवक्ता रंजीत चतुर्वेदी समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अभी भी फरार है।
पुलिस पिछले पांच वर्षों में सर्पदंश से मौत के संदिग्ध मामलों की भी जांच कर रही है। अब तक करीब 15 संदिग्ध प्रकरण चिन्हित किए गए हैं और अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
