भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के मामले में 9 दिन बीत जाने के बाद भी परिजनों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। परिवार का आरोप है कि अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है और मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
मृतक के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि परिवार को पुलिस की जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि जांच उन्हीं अधिकारियों की निगरानी में कराई जा रही है, जिन पर घटना में शामिल होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है।
चंदन तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से परिवार पर मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में पुलिस की जांच पर विश्वास करना संभव नहीं है।
परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ सके। परिवार ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि फांसी की सजा देने की भी मांग की है।
परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायिक जांच पर भी भरोसा नहीं है। उनकी मांग थी कि मामले की जांच किसी मौजूदा (सिटिंग) हाई कोर्ट जज की निगरानी में कराई जाए, लेकिन सरकार ने हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है, जिससे परिवार संतुष्ट नहीं है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अब परिजन लगातार सीबीआई जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, इस मामले पर प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
