रायपुर: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारत नेट (BharatNet) परियोजना का उद्देश्य देश की हर ग्राम पंचायत तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाकर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में यह लक्ष्य अभी अधूरा है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार राज्य की 11,693 ग्राम पंचायतों में से केवल 9,759 पंचायतों तक ही भारत नेट की सुविधा पहुंच सकी है, जबकि 1,934 ग्राम पंचायतें अब भी हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित हैं।
राज्य सरकार पंचायतों को ई-ऑफिस प्रणाली से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, ताकि फाइलों का संचालन, योजनाओं की मॉनिटरिंग और प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ऑनलाइन हो सकें। लेकिन कई पंचायतों में इंटरनेट की धीमी गति और बार-बार नेटवर्क बाधित होने के कारण यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रही है।
स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाते हुए, राज्य में 200 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया है। कई पंचायतें किराए के भवनों या अस्थायी परिसरों से संचालित हो रही हैं, जिससे डिजिटल उपकरणों की स्थापना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिक सेवाओं के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत नेट का उद्देश्य केवल इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर जन्म-मृत्यु पंजीयन, मनरेगा भुगतान, पेंशन, संपत्ति कर, ग्राम सभा रिकॉर्ड और ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) जैसी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाना भी है। जब तक हर पंचायत में मजबूत इंटरनेट और आवश्यक डिजिटल बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं होगा, तब तक ई-गवर्नेंस का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।
ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि भारत नेट परियोजना, पंचायत भवन निर्माण और डिजिटल संसाधनों के विस्तार में तेजी लाई जाती है, तो पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी, योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी और ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
