रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को नवा रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा सदन में जमकर गूंजा। कांग्रेस ने इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद विपक्षी विधायकों ने सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विधानसभा नियमावली के तहत इस स्थिति में कांग्रेस विधायक स्वतः निलंबित हो गए, जिसके बाद उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस ने उठाए पुनर्वास और कार्रवाई पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि नकटी गांव में हटाए गए 85 मकानों में कई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित थे, जहां बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध थीं।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवार वर्षों से वहां रह रहे थे और उन्हें पर्याप्त पुनर्वास उपलब्ध कराए बिना कार्रवाई करना अमानवीय है।
कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता थी, तो पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए थी। उनका आरोप था कि गरीबों के आशियाने उजाड़कर विकास कार्य करना उचित नहीं कहा जा सकता।
भाजपा ने मांगे दस्तावेज
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण या अन्य संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं,
तो उन्हें सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
सरकार का जवाब: पूरी कार्रवाई रही वैधानिक
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नकटी गांव में अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद विधिवत जांच कराई गई थी। जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाए जाने के बाद वर्ष 2025 में बेदखली के आदेश जारी किए गए थे, जिनके आधार पर 28 जून को कार्रवाई की गई।
मंत्री ने बताया कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी प्रभावित परिवारों को सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया था।
पात्र परिवारों के पुनर्वास के लिए नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं और उनके घरेलू सामान को भी सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बारिश के दौरान बिना तैयारी के कार्रवाई किए जाने के विपक्ष के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
स्थगन प्रस्ताव खारिज, विपक्ष का विरोध
सरकार का जवाब सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विधानसभा के नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में विपक्षी विधायक स्वतः निलंबित माने गए। इसके बाद कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया, जबकि विधानसभा की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ती रही।
