नई दिल्ली। BRICS समिट के गाला डिनर में 100 प्रतिशत शाकाहारी खाना परोसे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। डिनर के मेन्यू को लेकर कुछ विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब भारत में बड़ी संख्या में लोग नॉन-वेज भोजन करते हैं, तो विदेशी मेहमानों के लिए केवल शाकाहारी खाना ही क्यों रखा गया।
इसी बीच आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ग्रिम्सन का एक पुराना किस्सा चर्चा में आ गया है। उन्होंने वर्ष 2005 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जब आइसलैंड पहुंचे थे, तब उनके सम्मान में आयोजित पूरा स्टेट डिनर शाकाहारी रखा गया था।
कलाम के सम्मान में रखा गया था शाकाहारी स्टेट डिनर
ग्रिम्सन के मुताबिक, 2005 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आइसलैंड यात्रा के दौरान उनके सम्मान में आयोजित स्टेट डिनर का मेन्यू उनकी भोजन संबंधी पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। पूरे डिनर में शाकाहारी भोजन परोसा गया।
ग्रिम्सन के इस बयान ने BRICS गाला डिनर को लेकर चल रही बहस को एक अलग संदर्भ दे दिया है। उनका कहना है कि किसी मेहमान के सम्मान में डिनर का मेन्यू तय करते समय मेहमान की पसंद और सम्मान को प्राथमिकता देना असामान्य बात नहीं है।
BRICS डिनर के मेन्यू पर क्यों उठे सवाल?
BRICS समिट के गाला डिनर में पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसे जाने की चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने सवाल किया कि भारत जैसे विविध खान-पान वाले देश में विदेशी मेहमानों के लिए नॉन-वेज विकल्प क्यों नहीं रखा गया।
वहीं, दूसरी ओर यह तर्क भी सामने आया कि किसी औपचारिक डिनर का मेन्यू मेहमानों की पसंद, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और आयोजन की थीम को ध्यान में रखकर तय किया जा सकता है। इसी संदर्भ में डॉ. कलाम के सम्मान में आइसलैंड में आयोजित शाकाहारी स्टेट डिनर का उदाहरण दिया जा रहा है।
पुराने किस्से से बदली बहस की दिशा
आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ग्रिम्सन द्वारा साझा किए गए 2005 के इस किस्से के बाद BRICS गाला डिनर के मेन्यू को लेकर चल रही चर्चा को एक नया संदर्भ मिल गया है। अब बहस केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि डिनर में क्या परोसा गया, बल्कि यह भी चर्चा हो रही है कि किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में विदेशी मेहमानों की व्यक्तिगत पसंद और सम्मान का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए।
BRICS समिट जैसे बड़े वैश्विक आयोजन में भोजन भी कूटनीतिक आतिथ्य का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में डिनर के मेन्यू को लेकर शुरू हुई चर्चा अब भारत की मेहमाननवाजी और पुराने राजकीय आयोजनों के उदाहरणों से भी जोड़ी जा रही है।
